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फर्जी सरकारी वेबसाइट रैकेट का भंडाफोड़, MCA डिग्रीधारी आरोपी गिरफ्तार

jantaserishta.com
26 May 2026 5:00 PM IST
फर्जी सरकारी वेबसाइट रैकेट का भंडाफोड़, MCA डिग्रीधारी आरोपी गिरफ्तार
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पुलिस के अनुसार, आरोपी ने 'परिवहन डॉट ऑनलाइन' नामक एक फर्जी वेबसाइट तैयार की थी, जिसे इस तरह डिजाइन किया गया था कि वह असली सरकारी ट्रांसपोर्ट सेवा पोर्टल जैसी दिखे.
नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम सेल, सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ने एक बड़े फर्जी सरकारी वेबसाइट रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो नकली सरकारी पोर्टल बनाकर देशभर के लोगों से ठगी कर रहा था। इस मामले में एक एमसीए डिग्रीधारी आरोपी को उत्तर प्रदेश के इटावा से गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने 'परिवहन डॉट ऑनलाइन' नामक एक फर्जी वेबसाइट तैयार की थी, जिसे इस तरह डिजाइन किया गया था कि वह असली सरकारी ट्रांसपोर्ट सेवा पोर्टल जैसी दिखे। इस वेबसाइट के जरिए लोगों को वाहन नंबर प्लेट बुकिंग और अन्य सरकारी सेवाओं के नाम पर ठगा जा रहा था।
एक शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने गूगल पर वाहन नंबर प्लेट बुकिंग सर्च किया था, जिसके बाद वह इस फर्जी वेबसाइट पर पहुंच गया। उसे वेबसाइट असली लगी और उसने 1,099 रुपए का ऑनलाइन भुगतान कर दिया। इसके बाद उससे लगातार अलग-अलग बहानों से और पैसे मांगे गए, जिससे उसे शक हुआ और उसने एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।
इसके बाद साइबर पुलिस स्टेशन, सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस ने डिजिटल फॉरेंसिक, बैंक ट्रांजैक्शन ट्रेल, डोमेन डिटेल्स और आईपी लॉग्स की जांच की। इससे पता चला कि यह वेबसाइट जानबूझकर सरकारी पोर्टल की तरह डिजाइन की गई थी ताकि लोगों का भरोसा जीतकर उनसे पैसे ठगे जा सकें।
तकनीकी जांच में आरोपी का मोबाइल नंबर और अन्य डिजिटल लिंक सामने आए, जिसके आधार पर उसकी पहचान इटावा निवासी अंशुल यादव के रूप में हुई। पुलिस ने बताया कि आरोपी अंशुल यादव एमसीए डिग्रीधारी है और उसे वेबसाइट डिजाइनिंग, डोमेन होस्टिंग, बैकएंड मैनेजमेंट और पेमेंट गेटवे इंटीग्रेशन की तकनीकी जानकारी थी। इसी विशेषज्ञता का उपयोग कर वह फर्जी वेबसाइटें बनाता और साइबर ठगों को उपलब्ध कराता था।
जांच में यह भी सामने आया कि इस रैकेट से जुड़े कई बैंक अकाउंट्स और फर्जी वेबसाइट्स के जरिए देशभर में लोगों से ठगी की गई है। ठगी की रकम को म्यूल बैंक खातों के जरिए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया जाता था।
पुलिस ने आरोपी के पास से 2 लैपटॉप, 2 मोबाइल फोन, फर्जी वेबसाइट के सोर्स फाइल्स, लॉगिन डिटेल्स, पासवर्ड और डोमेन से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस अब इस मामले में अन्य सहयोगियों की पहचान, बैंक खातों के ट्रांजैक्शन और पूरे नेटवर्क के इंटरस्टेट कनेक्शन की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह से जुड़े और पीड़ितों का भी पता लगाया जा रहा है।
दिल्ली पुलिस ने कहा है कि यह एक संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत साइबर ठगी नेटवर्क था, जो सरकारी डिजिटल सेवाओं की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा था।
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