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फड़णवीस ने ट्रिगर मानदंड से परे सूखा राहत का आश्वासन दिया

Tulsi Rao
30 Sept 2026 7:13 AM IST
फड़णवीस ने ट्रिगर मानदंड से परे सूखा राहत का आश्वासन दिया
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मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा कि जिन तालुकाओं में सूखे से राहत के लिए तय 'ट्रिगर-1' या 'ट्रिगर-2' के नियम लागू नहीं होते, लेकिन वहां फसलों का भारी नुकसान हुआ है, वहां के किसान भी मदद पाने के हकदार होंगे।

राज्य कैबिनेट ने ज़मीनी स्तर पर जांच (ग्राउंड-ट्रूथिंग) को रेवेन्यू-सर्कल स्तर तक बढ़ाने का फ़ैसला किया है ताकि तकनीकी वजहों से किसानों को राहत से वंचित न रहना पड़े। यह फ़ैसला तब लिया गया जब कई कैबिनेट मंत्रियों ने अपने ज़िलों के उन तालुकाओं का मुद्दा उठाया, जहां फ़सल के नुकसान की रिपोर्ट के बावजूद उन्हें सूखा-राहत सूची में शामिल नहीं किया गया था।

कैबिनेट बैठक में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि लगभग 20 तालुका 'ट्रिगर-1' के तहत शामिल होने के लिए योग्य नहीं पाए गए क्योंकि वे तय नियमों को पूरा नहीं करते थे। श्री फडणवीस ने मंत्रियों को भरोसा दिलाया कि इन इलाकों के किसानों को बिना मदद के नहीं छोड़ा जाएगा।

बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए श्री फडणवीस ने कहा कि कुछ तालुकाओं में फ़सल का नुकसान तो हुआ, लेकिन वे 'ट्रिगर-1' के नियमों पर खरे नहीं उतरे। इसलिए कैबिनेट ने फ़ील्ड-लेवल पर जांच करने और उन किसानों को मदद देने का फ़ैसला किया है जिनकी फ़सलें खराब पाई गई हैं।

श्री फडणवीस ने कहा, "इस साल अजीब स्थिति है; पहले दो महीनों में बहुत ज़्यादा बारिश हुई और उसके बाद के दो महीनों में बिल्कुल सूखा रहा। भले ही फ़सलें तकनीकी नियमों के दायरे में न आएं, लेकिन अगर खेतों में फ़सलें सचमुच सूख गई हैं, तो किसानों को बेसहारा नहीं छोड़ा जा सकता। इसलिए, सर्कल स्तर पर असल जांच के बाद किसानों को सूखे से जुड़ी सभी तरह की मदद दी जाएगी।"

उन्होंने कहा कि जिन तालुकाओं में न तो 'ट्रिगर-1' और न ही 'ट्रिगर-2' लागू होता है, वहां भी फ़सलों की असल हालत का आकलन किया जाएगा। कैबिनेट ने इस मामले को अपनी सूखा उप-समिति को सौंप दिया है, जो प्रभावित इलाकों में स्थिति पर लगातार नज़र रखेगी।

उन्होंने कहा, "जिन किसानों को सचमुच नुकसान हुआ है, उन्हें तकनीकी वजहों से मदद से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। जहां फ़सलें सचमुच सूख गई हैं लेकिन तालुका को पहली सूची में शामिल नहीं किया गया है, वहां के किसानों को भी मदद मिलेगी।" राज्य के 358 तालुकों में से 265, यानी लगभग 74 प्रतिशत को पहले ही सूखा-प्रभावित घोषित किया जा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि बाकी बचे कुछ तालुकों में, किसी खास रेवेन्यू सर्कल में हुई भारी बारिश की वजह से पूरे तालुक की औसत बारिश का आंकड़ा बढ़ गया। नतीजतन, केंद्र सरकार के सूखा-प्रबंधन कोड के तहत 'ट्रिगर-1' और 'ट्रिगर-2' की तकनीकी शर्तें पूरी नहीं हो पाईं, भले ही इन तालुकों के कुछ हिस्सों में फसलें सूख गई थीं।

अधिकारियों ने बताया कि कैबिनेट बैठक के दौरान कई मंत्रियों ने इस मुद्दे पर ध्यान दिलाया और प्रभावित किसानों के लिए राहत की मांग की।

कैबिनेट ने पशुओं के चारे की कमी को दूर करने और डेयरी फार्मिंग व पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए महाराष्ट्र की पहली चारा विकास नीति को भी मंज़ूरी दी।

महाराष्ट्र में लगभग 2.78 करोड़ पशु हैं और अभी राज्य में हरे चारे की 22.79 प्रतिशत और सूखे चारे की 21.43 प्रतिशत कमी है। यह नीति चारे की खेती, साइलेज उत्पादन, फ़ीड ब्लॉक, हाइड्रोपोनिक चारा और अज़ोला की खेती को बढ़ावा देगी।

सरकार ने इस नीति के तहत 496 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिससे हर साल 12,000 लोगों को फ़ायदा होने की उम्मीद है।

यह नीति रेवेन्यू और वन विभागों के तहत खाली पड़ी ज़मीनों और चरागाहों पर चारे की खेती को प्रोत्साहित करेगी, साथ ही बागवानी-वानिकी-चरागाह प्रणालियों, साइलेज उत्पादन और हाइड्रोपोनिक चारा तकनीक को भी बढ़ावा देगी।

इस नीति का मकसद मौजूदा खरीफ़ सीज़न के दौरान 265 तालुकों में बताई गई चारे की कमी को दूर करना और पूरे राज्य में चारे की उपलब्धता को मज़बूत करना है।

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