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मां दुर्गा की विदाई के बाद भी गरीबों को मिला सहारा, विसर्जन घाट पर दिखा भावुक नजारा

SHIDDHANT
22 Oct 2026 11:19 PM IST
मां दुर्गा की विदाई के बाद भी गरीबों को मिला सहारा, विसर्जन घाट पर दिखा भावुक नजारा
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जमशेदपुर। झारखंड के जमशेदपुर में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के बाद घाटों पर एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जो आस्था के साथ जीवन की कठिनाइयों को भी बयां करती है। जहां एक ओर श्रद्धालु नम आंखों से मां दुर्गा को विदाई दे रहे थे, वहीं दूसरी ओर कुछ जरूरतमंद लोग विसर्जित प्रतिमाओं में इस्तेमाल हुए बांस और बल्लियों को इकट्ठा करते नजर आए। इन लकड़ियों का उपयोग वे अपने घरों की मरम्मत और अन्य घरेलू जरूरतों में कर सकते हैं।
प्रतिमा का सहारा बने बांस अब जरूरतमंदों के काम आएंगे
दुर्गा पूजा के दौरान प्रतिमाओं को मजबूती देने के लिए बांस और लकड़ी की बल्लियों का इस्तेमाल किया जाता है। कई दिनों तक यही सामग्री प्रतिमाओं के ढांचे को सहारा देती है। विसर्जन के बाद जब प्रतिमाएं पानी में प्रवाहित कर दी जाती हैं, तो लकड़ी और बांस के कुछ हिस्से घाटों के आसपास रह जाते हैं। जमशेदपुर के विसर्जन घाटों पर कुछ लोग इन्हीं बांस और बल्लियों को एकत्र करते दिखाई दिए। जरूरतमंद परिवारों के लिए ऐसी सामग्री उपयोगी साबित हो सकती है।
आस्था के साथ सामने आई गरीबी की तस्वीर
इस दृश्य का एक भावनात्मक पहलू भी है। जिन बांसों ने पूजा के दौरान मां दुर्गा की प्रतिमा को सहारा दिया, वही अब किसी जरूरतमंद परिवार के घर की छत, बाड़ या अन्य घरेलू कार्यों में इस्तेमाल हो सकते हैं। यह तस्वीर बताती है कि समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए रोजमर्रा की छोटी-छोटी चीजें भी कितनी महत्वपूर्ण होती हैं।
विसर्जन घाट पर दिखा जीवन का दूसरा पहलू
दुर्गा पूजा का पर्व श्रद्धा, उत्साह और सामूहिक भागीदारी के साथ मनाया जाता है। प्रतिमा विसर्जन के साथ धार्मिक आयोजन संपन्न हो जाता है, लेकिन घाटों पर बची सामग्री कुछ लोगों के लिए उपयोगी संसाधन बन जाती है। हालांकि, एकत्र किए गए बांस और बल्लियों का वास्तव में किन घरों में और किस उद्देश्य से इस्तेमाल किया जाएगा, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
मानवीय संवेदना का संदेश
जमशेदपुर के घाटों का यह दृश्य आस्था और जरूरत के बीच एक अनोखा संबंध दिखाता है। साथ ही यह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की परिस्थितियों पर ध्यान देने की जरूरत भी याद दिलाता है। कई श्रद्धालुओं के लिए मां दुर्गा की विदाई धार्मिक अनुष्ठान का समापन है, जबकि घाटों पर बांस इकट्ठा करने वाले जरूरतमंदों के लिए यही सामग्री जीवन की छोटी-बड़ी जरूरतें पूरी करने का एक साधन बन सकती है।
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