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Delhi दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 18 और 19 सितंबर को बीसी जिंदल समूह की कंपनियों और उनके निदेशकों के खिलाफ विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 के कथित उल्लंघन के मामले में बड़ी कार्रवाई की। ईडी ने दिल्ली-एनसीआर और हैदराबाद में 13 परिसरों में तलाशी अभियान चलाया, जिसमें जिंदल समूह की कंपनियों—जिंदल इंडिया थर्मल पावर लिमिटेड (जेआईटीपीएल), जिंदल इंडिया पावरटेक लिमिटेड, और जिंदल पॉली फिल्म्स लिमिटेड (जेपीएफएल) के साथ-साथ निदेशक श्याम सुंदर जिंदल, उनकी पत्नी शुभद्रा जिंदल और बेटे भावेश जिंदल के ठिकानों पर छापेमारी की गई। ईडी को विशेष जानकारी मिली थी कि जिंदल समूह ने विदेशी निवेश और धन की हेराफेरी के जरिए फेमा नियमों का उल्लंघन किया। जांच में पता चला कि जेपीएफएल ने दुबई की अपनी विदेशी इकाई टोपाज एंटरप्राइज डीएमसीसी को 505.14 करोड़ रुपए का ऋण दिया, जिसका इस्तेमाल गार्नेट एंटरप्राइज डीएमसीसी नामक एक अन्य विदेशी कंपनी की शेयरधारिता खरीदने में किया गया। यह राशि कथित तौर पर ओवरसीज डायरेक्ट इनवेस्टमेंट (ओडीआई) की आड़ में हस्तांतरित की गई थी।
जांच में यह भी सामने आया कि जेपीएफएल ने 2013-14 और 2016-17 के बीच जिंदल इंडिया पावरटेक लिमिटेड में 703.79 करोड़ रुपए का निवेश किया, जिसे बाद में ओडिशा में कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट के लिए जेआईटीपीएल में लगाया गया। लेकिन 2018-19 में, इस निवेश को वसूलने के बजाय, जेपीएफएल ने इसे नुकसान में बट्टे खाते में डाल दिया और अपनी ही समूह कंपनियों को कम कीमत पर बेच दिया। इसके अलावा, जेआईटीपीएल ने तरजीही शेयरों के मोचन से 853.72 करोड़ रुपए प्राप्त किए, लेकिन इस राशि को जेपीएफएल को वापस करने के बजाय, टोपाज एंटरप्राइज डीएमसीसी को 505.14 करोड़ रुपए हस्तांतरित कर दिए गए, जिसने गार्नेट एंटरप्राइज डीएमसीसी में 100 फीसद हिस्सेदारी खरीदी। जांच में पता चला कि गार्नेट एंटरप्राइज, टोपाज की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है और इसके जरिए नीदरलैंड, अमेरिका, बेल्जियम, इटली, सिंगापुर और अन्य देशों में जिंदल परिवार की विदेशी कंपनियों में निवेश किया गया।
तलाशी के दौरान बरामद दस्तावेजों से खुलासा हुआ कि 505.14 करोड़ रुपए का हस्तांतरण नकली लेनदेन और फर्जी मूल्यांकन के आधार पर किया गया। दो अलग-अलग मूल्यांकनकर्ताओं की रिपोर्ट्स में शेयरों का मूल्य बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया, ताकि अधिक धन विदेश भेजा जा सके। श्याम सुंदर जिंदल इन विदेशी इकाइयों के लाभकारी मालिक और टोपाज के 100 फीसद शेयरधारक हैं। ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि जिंदल समूह ने नीदरलैंड, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, जर्मनी और अन्य देशों में फेमा नियमों का उल्लंघन करते हुए धन जमा किया। तलाशी के दौरान श्याम सुंदर जिंदल भारत में मौजूद नहीं थे और हांगकांग में होने की बात कहकर जांच में शामिल नहीं हुए। ईडी की जांच अभी जारी है।
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