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SIR के तीनों आदेश सर्वसम्मति से लिए गए
दिल्ली। भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण हलफनामा दाखिल किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी किए गए तीनों SIR आदेश सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय थे। आयोग ने यह जवाब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाली याचिकाओं के संबंध में दाखिल किया है।
तीनों SIR आदेशों पर आयोग की सहमति
निर्वाचन आयोग ने अपने हलफनामे में कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित तीनों आदेश आयोग के सामूहिक निर्णय थे। आयोग के अनुसार, इन आदेशों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों के बीच सहमति थी।
इस स्पष्टीकरण के जरिए निर्वाचन आयोग ने निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों पर अपना पक्ष रखा है।
CEC और दोनों चुनाव आयुक्तों ने दी मंजूरी
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अदालत में प्रस्तुत जवाबी हलफनामे को भी मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी है।
निर्वाचन आयोग का यह बयान उन याचिकाओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR मतदाता सूचियों की जांच और अद्यतन करने की प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया को लेकर उठे कानूनी सवालों के बीच निर्वाचन आयोग ने अदालत के सामने अपना पक्ष स्पष्ट किया है।
हालांकि, आयोग का हलफनामा उसका आधिकारिक पक्ष है और याचिकाओं में उठाए गए कानूनी प्रश्नों पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट को करना है।
अब इस मामले में अदालत की आगे की सुनवाई और आदेश पर नजर रहेगी।
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