भारत

लैंसडौन का नाम बदलने के प्रयासों का होगा विरोध, सीईओ को सौंपा ज्ञापन

Admin Delhi 1
29 May 2023 10:22 AM IST
लैंसडौन का नाम बदलने के प्रयासों का होगा विरोध, सीईओ को सौंपा ज्ञापन
x

पौड़ी गढ़वाल/लैंसडौन: स्थानीय नागरिकों ने ब्रिटिश वायसराय लार्ड लैंसडौन के नाम से बसी पर्यटन व सैन्य नगरी लैंसडौन का नाम बदलने के प्रयासों का पुरजोर विरोध किया है। कहा कि रक्षा मंत्रालय की ओर से इस बारे में चल रही कवायद का जनता में भारी विरोध हो रहा है। लैंसडौन को नाम बदलने की नहीं, बल्कि अंग्रेजों के समय के बने छावनी के कायदे कानूनों से मुक्ति दिलाने की जरूरत है। जिससे यहां के लोगों को बुनियादी सुविधाएं मिल सके।

शनिवार को जागरूक नागरिक मंच के अध्यक्ष गंभीर सिंह रावत, संदीप रावत, अनूप कन्नौजिया, राजेश अग्रवाल, राजेश्वर गुप्ता ने कैंट बोर्ड की सीईओ शिल्पा ग्वाल के माध्यम से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को ज्ञापन भेजा। कहा कि पर्यटन नगरी लैंसडौन का नाम पूरे विश्व में विख्यात है। आजादी के 75 साल बाद नगर का नाम बदलने का कोई औचित्य नहीं है। नाम बदलने की प्रक्रिया से सरकार पर राजस्व का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। मंच के अध्यक्ष गंभीर सिंह रावत ने कहा की लैंसडौन नगर का नाम परिवर्तन करने से पर्यटन पर बुरा असर पड़ेगा। पर्यटकों को भी लैंसडौन नाम से पहाड़ का पर्यटन स्थल याद आता है।गढ़वाल राइफल्स का गढ़ है लैंसडाउन


लैंसडाउन पहाड़ी क्षेत्र में के हरे-भरे प्राकृतिक वातावरण में स्थित है और इसे सन् 1887 में ब्रिटिश काल में बसाया गया। लैंसडाउन को ब्रिटिश द्वारा वर्ष 1887 में बसाया गया। उस समय के वायसराय ऑफ इंडिया लॉर्ड लैंसडाउन के नाम पर ही इसका नाम रखा गया। वैसे, इसका वास्तविक नाम कालूडांडा है। यह पूरा क्षेत्र सेना के अधीन है और गढ़वाल राइफल्स का गढ़ भी है। आप यहाँ गढ़वाल राइफल्स वॉर मेमोरियल और रेजिमेंट म्यूजियम देख सकते हैं। यहाँ गढ़वाल राइफल्स से जुड़ी चीजों की झलक पा सकते हैं। संग्रहालय शाम के 5 बजे तक ही खुला रहता है। इसके करीब ही परेड ग्राउंड भी है, जिसे आम पर्यटक बाहर से ही देख सकते हैं। वैसे, यह स्थान स्वतंत्रता आन्दोलन की कई गतिविधियों का गवाह भी रह चुका है।

Next Story