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अचल संपत्तियों से जुड़े सबूतों के साथ ED ने की बड़ी कार्रवाई
Hyderabad हैदराबाद। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद जोनल ऑफिस ने ड्रग्स से जुड़े एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सख्त कार्रवाई की है। ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत 4.79 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों को प्रोविजनली अटैच (जब्त) कर लिया है। यह कार्रवाई साइकोट्रोपिक सब्सटेंस अल्प्राजोलम की गैरकानूनी मैन्युफैक्चरिंग और बिक्री से हुई कमाई को छिपाने के मामले में की गई है।
ईडी ने संगारेड्डी जिले के गुम्माडीडाला पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। आरोपियों में गिरमागौनी सुधीर, बिश्वेश्वर सिंह, राजेश्वर शर्मा जोशी, भवानीगरी प्रभु वर गौड़, गजेला श्रीशैलम गौड़ और अन्य शामिल हैं। इनकी संपत्तियां तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के विभिन्न जिलों में फैली हुई हैं।
जांच में सामने आया कि गिरमागौनी सुधीर 2014 से अपने भाई भवानीगरी प्रभुवर गौड़ और बहनोई गजेला श्रीशैलम गौड़ की मदद से कमीशन पर अल्प्राजोलम खरीद-बिक्री के धंधे में लगा था। वे अल्प्राजोलम को ताड़ी (देशी शराब) बेचने वालों को बेचते थे, जो इसे ताड़ी में मिलाकर उसकी नशे की ताकत बढ़ाते थे। बाद में बिश्वेश्वर सिंह की मदद से यह धंधा और बड़ा हुआ।
2023 में जी सुधीर गौड़ और बिश्वेश्वर सिंह ने राजेश्वर शर्मा जोशी के साथ मिलकर हैदराबाद के अब्दुल्लापुरमेट के बछाराम गांव में साई प्रिया केमिकल्स नाम की फैक्ट्री खरीदी। इसका नाम बदलकर स्टैनकेम केमिकल्स कर दिया गया। आरोपियों ने इसी फैक्ट्री में अल्प्राजोलम की गैरकानूनी उत्पादन शुरू किया। बिक्री से होने वाली कमाई को फैक्ट्री में निवेश के हिसाब से बांटा जाता था।
ईडी की जांच में पाया गया कि अल्प्राजोलम की गैरकानूनी बिक्री से कमाई मुख्य रूप से कैश में मिलती थी। इस कैश का इस्तेमाल सीधे अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया या बैंक अकाउंट में जमा करके लोन चुकाने और प्रॉपर्टी खरीदने के लिए इस्तेमाल किया गया। आरोपी और उनकी पत्नियों के नाम पर भी संपत्तियां खरीदी गईं।
21 अगस्त 2025 को ईडी ने इस मामले में सात जगहों पर तलाशी ली थी। इसमें गलत दस्तावेज, 5 लाख रुपए नकद, 834 अमेरिकी डॉलर, 1910 यूरो, 100 ग्राम सोना और 2996.231 ग्राम वजन की 17 चांदी की छड़ें जब्त की गईं। ये सबूत अपराध की कमाई को छिपाने और वैध दिखाने की कोशिश को साबित करते हैं। अटैच की गई 4.79 करोड़ रुपए की संपत्तियां क्राइम प्रोसीड्स (अपराध से हुई कमाई) या उसके बराबर मूल्य की हैं। ईडी ने इनके ट्रांसफर या बिक्री को रोकने के लिए प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया है।
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