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Aizawl आइजोल: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को बताया कि उसने मिजोरम की राजधानी आइजोल में सरकारी सब्सिडी के फर्जी दावों से जुड़े मामले में पहली चार्जशीट दाखिल की है। ईडी के आइजोल सब-जोनल कार्यालय ने 30 मार्च को धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) की धारा 45 और 44 के तहत आइजोल स्थित विशेष अदालत में रवि गुलगुलिया और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में चार्जशीट दाखिल की।
ईडी ने बताया कि यह जांच मिजोरम पुलिस भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी, जिसमें भारतीय दंड संहिता, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराएं शामिल थीं। आधिकारिक बयान के अनुसार, जांच में सामने आया कि रवि गुलगुलिया ने मार्गरेट एम. वार्टे के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रचते हुए आइजोल के पास मेसर्स मिज़ो कार्बन प्रोडक्ट्स (एमसीपी) के नाम से कोक उत्पादन इकाई स्थापित की। इसका उद्देश्य केंद्र सरकार की सब्सिडी को धोखाधड़ी से हासिल करना था।
जांच में यह भी पाया गया कि संबंधित यूनिट दावा किए गए समय के दौरान चालू ही नहीं थी। इसके बावजूद उत्पादन, माल ढुलाई, कच्चे माल की खरीद और डीजल खपत से जुड़े फर्जी दस्तावेज तैयार कर केंद्रीय परिवहन सब्सिडी (सीटीएस) के तहत करीब 2.47 करोड़ रुपये और केंद्रीय पूंजी निवेश सब्सिडी (सीसीआईएस) के तहत 93.90 लाख रुपये का दावा किया गया।
ईडी के मुताबिक, इस पूरे घोटाले से लगभग 3.41 करोड़ रुपये की अवैध आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) उत्पन्न हुई।
जांच में यह भी सामने आया कि सब्सिडी की राशि मिलते ही इसे कई कंपनियों और बैंक खातों के जरिए घुमाया गया। ये खाते रवि गुलगुलिया के नियंत्रण में थे, जिनमें रवि गुलगुलिया एंड संस (एचयूएफ), मेसर्स शिवरात्रि कमोडिटीज़ प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स थर्डवेव सप्लायर्स प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स गुलगुलिया ट्रेड कॉर्पोरेशन और मेसर्स यश मार्केटिंग इंडिया शामिल हैं।
ईडी के अनुसार, इन पैसों को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर सर्कुलर ट्रांजैक्शन के जरिए घुमाया गया और अंततः मुख्य आरोपी के निजी खातों तथा मेसर्स ग्लोबल एंट्रेड में ट्रांसफर किया गया, जहां 45 लाख रुपये की संदिग्ध राशि पहुंची।
इस मामले में ईडी ने पहले ही पीएमएलए की धारा 5 के तहत 38.40 लाख रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है।
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