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ED और I-PAC आमने-सामने, घोटाले की जांच पर हाई कोर्ट में कानूनी जंग

SHIDDHANT
8 Jan 2026 9:27 PM IST
ED और I-PAC आमने-सामने, घोटाले की जांच पर हाई कोर्ट में कानूनी जंग
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Kolkata कोलकाता। पश्चिम बंगाल में कोयला खनन घोटाले की जांच के दौरान गुरुवार को कोलकाता की सड़कों पर शुरू हुआ राजनीतिक और प्रशासनिक ड्रामा अब सीधे कानूनी लड़ाई में तब्दील हो गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और चुनावी रणनीतिकार संस्था इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) ने एक-दूसरे के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। ED ने अपनी याचिका में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। एजेंसी का दावा है कि कोयला खनन घोटाले की जांच के तहत जब I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन के आवास और कार्यालय में तलाशी अभियान चल रहा था, उस समय कार्रवाई पूरी तरह शांतिपूर्ण थी। लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचने के बाद हालात बिगड़ गए।

ईडी के अनुसार, ममता बनर्जी ने प्रतीक जैन के आवास में प्रवेश किया और वहां मौजूद भौतिक दस्तावेजों तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अपने साथ ले गईं। एजेंसी ने इसे जांच में सीधा हस्तक्षेप बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की यह कार्रवाई कानून के शासन के खिलाफ है और इससे महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं। ईडी ने अदालत में पेश याचिका में यह भी उल्लेख किया है कि सामने आए वीडियो फुटेज में ममता बनर्जी को एक भारी हरे रंग की फाइल लेकर परिसर से बाहर निकलते देखा गया है। दूसरी ओर, I-PAC ने भी कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। संस्था की ओर से दायर याचिका में ईडी की छापेमारी को अवैध और राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया गया है। I-PAC ने अदालत से मांग की है कि उसके कार्यालयों और अधिकारियों के खिलाफ की जा रही छापेमारी पर तत्काल रोक लगाई जाए। संस्था का आरोप है कि जांच एजेंसी का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने और मुख्यमंत्री को बदनाम करने के लिए किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईडी के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि एजेंसी की कार्रवाई पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है और केंद्र सरकार विपक्षी दलों को डराने के लिए जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। ममता बनर्जी का कहना है कि उन्होंने कोई कानून नहीं तोड़ा और सच्चाई अदालत के सामने आएगी। अब यह पूरा मामला कलकत्ता हाई कोर्ट में पहुंच चुका है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कानूनी टकराव सिर्फ एक जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति को और ज्यादा गर्माने वाला है। सभी की नजरें अब हाई कोर्ट के रुख और अगले आदेश पर टिकी हैं।
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