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हैदराबाद: तेलंगाना के बहुचर्चित फोन टैपिंग स्कैंडल में राज्य सरकार ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है. सरकार ने DSP दुग्याला प्रणीत कुमार की त्वरित पदोन्नति को रद्द करते हुए उन्हें डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस से घटाकर इंस्पेक्टर ऑफ पुलिस (सिविल) बना दिया है.
होम (स्पेशल) डिपार्टमेंट की ओर से 20 जनवरी 2026 को यह फैसला लिया गया. आदेश में कहा गया है कि प्रमोशन के बाद प्रोबेशन अवधि के दौरान प्रणीत कुमार का प्रदर्शन असंतोषजनक रहा और उनके खिलाफ गंभीर कदाचार के आरोप सामने आए.
2007 बैच के अधिकारी प्रणीत कुमार को पिछली BRS सरकार के कार्यकाल में एक विशेष योजना के तहत DSP पद पर त्वरित पदोन्नति दी गई थी. यह प्रमोशन उन्हें उग्रवाद विरोधी अभियानों और विशेष खुफिया ऑपरेशनों में सेवा के आधार पर मिली थी.
हालांकि, बाद की जांच में सामने आया कि उन्होंने कानूनी प्रक्रियाओं और सेवा आचरण नियमों का गंभीर उल्लंघन किया. तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (DGP) की ओर से सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट और आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, प्रणीत कुमार पर आरोप है कि उन्होंने आधिकारिक सिस्टम से 42 हार्ड डिस्क हटाकर दूसरी हार्ड डिस्क लगाईं. स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच (SIB) के डेस्कटॉप, लैपटॉप और सर्वर का अवैध सर्विलांस के लिए इस्तेमाल किया. कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), लोकेशन डेटा, IMEI नंबर, IP एड्रेस और अन्य गोपनीय सूचनाओं तक गैरकानूनी पहुंच बनाई. संवेदनशील सर्विलांस डेटा को निजी डिवाइस में स्टोर किया. डिजिटल सबूत मिटाने के लिए हार्ड डिस्क तोड़ी, डेटा डिलीट किया और CCTV कैमरे बंद किए. सरकार ने अपने आदेश में साफ लिखा कि ऐसा आचरण किसी अनुशासित बल के अधिकारी को शोभा नहीं देता.
प्रणीत कुमार 2016 से 2023 तक स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच में तैनात रहे. मार्च 2024 में उन्हें सस्पेंड कर दिया गया. उनके खिलाफ पंजागुट्टा पुलिस स्टेशन में आपराधिक मामला दर्ज किया गया, जो SIB के एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की शिकायत पर आधारित है. 12 दिसंबर 2024 को उनकी गिरफ्तारी हुई, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया. मामले में प्रारंभिक चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, जबकि जांच अभी जारी है.
सरकारी आदेश में यह भी कहा गया कि 31 मार्च 2023 को DSP का कार्यभार संभालने के बावजूद प्रणीत कुमार अनिवार्य एक साल की प्रोबेशन अवधि पूरी नहीं कर सके. आपराधिक मामले में संलिप्तता और सस्पेंशन के चलते उनका प्रोबेशन संतोषजनक नहीं माना गया.
इन तमाम तथ्यों को देखते हुए तेलंगाना सरकार ने DSP पद पर मिली त्वरित पदोन्नति को आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया और उन्हें उनकी मूल रैंक इंस्पेक्टर ऑफ पुलिस (सिविल) पर बहाल कर दिया गया है.
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