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ऊर्जा मंत्रालय
New Delhi. नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने भारत के सभी प्रमुख DRDO स्थलों में 300 मेगावाट क्षमता वाली सोलर-आधारित नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के विकास के लिए एक ऐतिहासिक साझेदारी समझौता (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह पहल DRDO के लिए स्वावलंबी और Net-Zero ऊर्जा कैंपस स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। MoU हस्ताक्षर समारोह में उपस्थित थे डॉ. समीर वी. कामत, सचिव, रक्षा R&D और DRDO के अध्यक्ष, तथा संतोष कुमार सारंगी, IAS, सचिव, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय। समारोह में दोनों पक्षों ने ऊर्जा उत्पादन, टिकाऊ विकास और पर्यावरण सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग की प्रतिबद्धता जताई।
यह समझौता DRDO और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के बीच रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देगा। इसका मुख्य उद्देश्य DRDO के सभी महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों में स्वदेशी, सौर ऊर्जा-आधारित समाधान स्थापित करना है, जिससे संगठन की ऊर्जा खपत पर निर्भरता कम हो और पर्यावरणीय प्रभाव न्यूनतम हो। DRDO के अध्यक्ष डॉ. कामत ने कहा कि यह MoU संगठन के लिए स्मार्ट और टिकाऊ कैंपस विकसित करने की दिशा में मील का पत्थर है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि 2027 तक DRDO के सभी रणनीतिक प्रतिष्ठानों को Net-Zero ऊर्जा कैंपस में परिवर्तित किया जाए। यह सिर्फ ऊर्जा बचत ही नहीं बल्कि संगठन की स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी सुदृढ़ करेगा।”
संतोष कुमार सारंगी ने इस अवसर पर कहा कि सरकार नवीकरणीय ऊर्जा और सौर ऊर्जा उत्पादन के महत्व को समझती है। उन्होंने बताया कि यह MoU DRDO और मंत्रालय के बीच दीर्घकालिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगा। MoU के तहत, DRDO के सभी प्रतिष्ठानों में सोलर पैनल इंस्टॉलेशन, ऊर्जा संग्रहण प्रणाली, और ऊर्जा दक्षता सुधार पर काम किया जाएगा। साथ ही, ऊर्जा निगरानी और नियंत्रण तंत्र को लागू किया जाएगा, जिससे सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल न केवल DRDO की ऊर्जा लागत को कम करेगी, बल्कि भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देगी। इससे DRDO का प्रत्येक प्रतिष्ठान स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ ऊर्जा पर निर्भर रहेगा। इस परियोजना का लक्ष्य है कि 2027 तक DRDO के सभी प्रमुख प्रतिष्ठान Net-Zero ऊर्जा कैंपस में परिवर्तित हों, जिससे संगठन पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम करने और सस्टेनेबल विकास को बढ़ावा देने में सक्षम हो। यह MoU DRDO के लिए ऊर्जा स्वावलंबन और टिकाऊ प्रौद्योगिकी अपनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है और भारत में रक्षा अनुसंधान संस्थानों के लिए सौर ऊर्जा आधारित नवीकरणीय परियोजनाओं की राह खोलता है।
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