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दहेज उत्पीड़न: पति ने कराया गर्भपात, 6 गिरफ्तार

SHIDDHANT
11 Oct 2025 8:12 PM IST
दहेज उत्पीड़न: पति ने कराया गर्भपात, 6 गिरफ्तार
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गर्भपात
Ghazipur गाजीपुर। उत्तर प्रदेश के कासिमाबाद इलाके से एक भयावह दहेज उत्पीड़न का मामला सामने आया है। यहां निकाह के एक साल के भीतर ही पति और ससुराल वालों ने दहेज में कार और ₹5 लाख की मांग शुरू कर दी। असमर्थता जताने पर पति ने अपनी गर्भवती पत्नी के पेट में लात मारकर जानबूझकर गर्भपात करा दिया और उसके सभी आभूषण और कपड़े छीनकर घर से निकाल दिया। यह मामला कासिमाबाद कोतवाली इलाके के सोनबरसा गांव का है। पीड़िता हरदासपुर घोसी मऊ जिले की रहने वाली है और उसकी शादी मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार 8 फरवरी 2024 को जीशान अहमद से हुई थी। शादी के समय लड़की के परिवार ने अपनी सामर्थ्य अनुसार दहेज दिया था, वहीं मेहर की रकम भी अदा की गई थी। निकाह के बाद कुछ समय तक सब ठीक-ठाक चलता रहा, लेकिन कुछ महीनों के भीतर ही पति और ससुराल वालों द्वारा कम दहेज लाने का ताना देना शुरू हो गया।
ससुराल वालों की मांग थी कि पहले से मिले मोटरसाइकिल को बेचकर उसकी जगह कार और ₹5 लाख नगद दिया जाए। मांग पूरी न करने पर पीड़िता को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। विवाहिता ने अपने परिजनों को इसकी जानकारी दी और कई बार पंचायत भी हुई, लेकिन ससुराल वालों की अत्याचार की प्रवृत्ति कम नहीं हुई। इसके अलावा, पति ने गैर महिलाओं के साथ संबंध बनाए और विरोध करने पर विवाहिता की लगातार पिटाई की। मई 2025 में विवाहिता गर्भवती थी, लेकिन पति द्वारा जानबूझकर पेट में मारा गया। जिससे उसका गर्भपात हो गया। पीड़िता के परिजनों ने उसे इलाज कराया। इलाज के बाद जब वह ससुराल में लौटने गई तो पति और अन्य सदस्यों ने उसके गहने और कपड़े छीनकर उसे घर से भगा दिया और धमकी दी कि जब तक उसके परिवार द्वारा दहेज की मांगे पूरी नहीं की जातीं, वह ससुराल में नहीं रह सकती।
पीड़िता तब से अपने मायके में रह रही है। इस दौरान ससुराल के लोग उसकी सुध तक नहीं ले रहे। जब भी वह संपर्क करने का प्रयास करती है, तो पति सहित अन्य लोग गाली-गलौज करते हैं। इस गंभीर घटना के बाद पीड़िता ने अपने पति जीशान अहमद समेत कुल 6 लोगों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और प्रताड़ना के आरोप में कासिमाबाद कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। मामला स्थानीय प्रशासन और कानून व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि दहेज उत्पीड़न और महिला के खिलाफ हिंसा के ऐसे मामले सामाजिक दृष्टि से चिंताजनक हैं और समय रहते कठोर कार्रवाई आवश्यक है।
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