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डोनाल्ड ट्रंप का दावा: भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध को रोका
Shantanu Roy
25 Aug 2025 10:30 PM IST

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New Delhi. नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कई सनसनीखेज दावे किए। उन्होंने खुद को "तानाशाह" नहीं बल्कि "बहुत समझदार शख्स" बताया और कहा कि उनके फैसलों ने दुनिया को कई बड़े युद्धों से बचाया। खासकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के समय उन्होंने स्थिति को संभाला और परमाणु युद्ध होने से रोका।
ट्रंप ने दावा किया कि उनके हस्तक्षेप के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध "अगले स्तर" तक नहीं बढ़ पाया। उनके अनुसार, उस समय दोनों देशों के बीच हालात इतने गंभीर थे कि यह परमाणु युद्ध का रूप ले सकता था। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के दौरान सात जेट विमानों को मार गिराया गया था और उनके पास स्थिति को नियंत्रित करने के लिए महज कुछ घंटे ही थे। ट्रंप ने कहा, “मैंने उस जंग को रोका, अगर मैं कदम नहीं उठाता तो नतीजे बेहद भयावह होते।”
ईरान पर ‘दोषरहित’ बमबारी ऑपरेशन का दावा
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान ईरान के खिलाफ किए गए एक बड़े सैन्य ऑपरेशन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका ने बड़े पैमाने पर बमबारी की थी और यह पूरी तरह सफल रहा था। इस ऑपरेशन में अमेरिका ने 52 टैंकरों के साथ F-22 और B-2 बमवर्षक विमानों का इस्तेमाल किया। ट्रंप ने इसे "दोषरहित ऑपरेशन" करार देते हुए कहा कि इसमें कोई चूक नहीं हुई थी और अमेरिकी सेना ने इसे पूरी मजबूती से अंजाम दिया।
टैरिफ नीति से युद्ध रोके जाने का दावा
ट्रंप ने अपने आर्थिक फैसलों पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि उनकी टैरिफ नीति ने अमेरिका को मजबूत बनाया और कई युद्धों को रोकने में मदद की। ट्रंप के अनुसार, "कोई नहीं जानता था कि टैरिफ इतनी बड़ी ताकत हो सकते हैं। इस नीति से खरबों डॉलर का राजस्व आया और अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली।"
उन्होंने कहा कि आर्थिक नीतियां कई बार सैन्य रणनीतियों से भी ज्यादा असरदार साबित होती हैं। उनके अनुसार, व्यापारिक दबाव और टैरिफ ने कई देशों को अमेरिका के साथ सहयोग करने के लिए मजबूर किया और संभावित संघर्षों को टाल दिया।
परमाणु निरस्त्रीकरण और रूस से बातचीत
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने वैश्विक परमाणु हथियारों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि वे परमाणु निरस्त्रीकरण चाहते हैं और इस मुद्दे पर उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत भी की थी। ट्रंप के मुताबिक, परमाणु हथियारों की बढ़ती संख्या पूरी दुनिया के लिए खतरा है और इसे रोकने की दिशा में काम करना होगा।
यूक्रेन और NATO पर बयान
ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध और NATO की भूमिका को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि उन्होंने अब तक यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है, लेकिन उन्हें विश्वास है कि इसका समाधान जल्द निकलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका सीधे यूक्रेन को पैसे नहीं खो रहा है, बल्कि NATO को हथियार और मिसाइलें देकर इसके बदले में कमाई कर रहा है। ट्रंप के अनुसार, “हम NATO को मिसाइलें देते हैं और वे यूक्रेन को देते हैं। इस प्रक्रिया में अमेरिका घाटे में नहीं है, बल्कि लाभ कमा रहा है।”
खुद को बताया समझदार नेता
अपने ऊपर लगने वाले "तानाशाही" के आरोपों को खारिज करते हुए ट्रंप ने कहा कि वे कभी भी तानाशाह नहीं रहे, बल्कि उन्होंने हमेशा समझदारी से फैसले लिए हैं। उन्होंने कहा कि अगर वे सख्त और निर्णायक नहीं होते, तो दुनिया कई और बड़े युद्धों की गवाह बन चुकी होती।
विश्लेषण – ट्रंप के दावों के निहितार्थ
डोनाल्ड ट्रंप के इन बयानों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। भारत-पाकिस्तान युद्ध को रोकने के दावे पर विशेषज्ञों का मानना है कि यह उनके कूटनीतिक हस्तक्षेप की ओर इशारा हो सकता है, हालांकि इसकी पुष्टि आधिकारिक तौर पर किसी भी देश ने नहीं की है। वहीं ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी के दावे ने भी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीति को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
ट्रंप की आर्थिक नीतियों, खासकर टैरिफ को लेकर उनका दृष्टिकोण पहले भी चर्चा का विषय रहा है। अब उनके इन बयानों से स्पष्ट होता है कि वे मानते हैं कि आर्थिक दबाव का इस्तेमाल सैन्य रणनीतियों के विकल्प के रूप में किया जा सकता है।
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