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चुनाव आयोग में अधिकारियों के काम के बंटवारे पर विवाद, दो आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को लिखे पत्र

jantaserishta.com
23 Oct 2026 2:39 PM IST
चुनाव आयोग में अधिकारियों के काम के बंटवारे पर विवाद, दो आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को लिखे पत्र
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बिना चर्चा के आदेश जारी करने का आरोप.
नई दिल्ली: चुनाव आयोग के अधिकारी मनीष गर्ग के कामकाज को लेकर चल रहे विवाद में अब एक नया खुलासा हुआ है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखकर गर्ग के कामकाज पर शिकायत की थी।
हालांकि, इन शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। RTI के जवाब में बताया गया कि कैबिनेट सचिवालय ने दोनों पत्रों को चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक शिकायत नहीं माना था। सचिवालय का कहना था कि इस स्तर पर कार्रवाई करना उचित नहीं होगा, क्योंकि इसे चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के कामकाज में हस्तक्षेप माना जा सकता है। यह जानकारी RTI एक्टिविस्ट लोकेश के. बत्रा को दी गई है।
बिना चर्चा के आदेश जारी करने का आरोप
मनीष गर्ग पर आरोप है कि उन्होंने बिना चर्चा ऐसा आदेश जारी किया, जिससे वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियां प्रभावित हो सकती थीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाद में दोनों चुनाव आयुक्तों ने गर्ग के आदेश को पलट दिया था।
रिपोर्ट के अनुसार, 30 जुलाई को दोनों आयुक्तों ने काम के बंटवारे से संबंधित आदेश रद्द कर दिया। साथ ही, यह निर्देश दिया कि जब तक आयोग में बदलाव को लेकर सहमति नहीं बन जाती, तब तक पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी।
मनीष गर्ग 1996 बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर के IAS अधिकारी हैं। अगस्त 2024 में केंद्र सरकार की कैबिनेट नियुक्ति समिति (ACC) ने उन्हें चुनाव आयोग में उप चुनाव आयुक्त नियुक्त करने की मंजूरी दी थी। उन्होंने 2 सितंबर 2024 को अपना पद संभाला था। इससे पहले गर्ग हिमाचल प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में काम कर रहे थे।
चुनाव आयोग के ...
मनीष गर्ग का नाम पहले भी चुनाव आयोग के आईटी सिस्टम से जुड़े विवाद में सामने आया था। द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने ERONet सॉफ्टवेयर तक निर्वाचन अधिकारियों की पहुंच पर सवाल उठाए थे। यह मामला मतदाता सूची के डेटा की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़ा था।
उनका कहना था कि कई निर्वाचन अधिकारियों को सिस्टम का पूरा एक्सेस नहीं मिल रहा था। इससे मतदाता सूची से जुड़े उनके कानूनी और आधिकारिक काम प्रभावित हो सकते थे। यह विवाद चुनाव आयोग के IT सिस्टम पर नियंत्रण और अधिकारियों को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने से जुड़ा था।
दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों के...
25 सितंबर को द इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों के दौरान आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी।
इन आपत्तियों में मतदाता सूची के डेटा पर नियंत्रण और अधिकारियों को जानकारी नहीं देने जैसे मुद्दे शामिल थे। इसके बाद 26 सितंबर को चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि मनीष गर्ग के काम के बंटवारे से जुड़े आदेश लागू नहीं किए गए थे। आयोग ने यह भी कहा कि आईटी विभाग की निगरानी वास्तव में नहीं हटाई गई थी।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी उठाए थे सवाल
3 अक्टूबर को कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मनीष गर्ग की भूमिका और चुनाव आयोग के IT सिस्टम से जुड़े कामकाज पर सवाल उठाए थे। इसके बाद 21 अक्टूबर को RTI से मिली जानकारी में सामने आया कि दोनों चुनाव आयुक्तों के पत्र कैबिनेट सचिवालय पहुंचे थे और उन्हें आगे संबंधित अधिकारियों को भेजा गया था। हालांकि, उस समय पत्रों में क्या लिखा था, इसकी जानकारी सामने नहीं आई थी।
अब RTI के जवाब से यह स्पष्ट हुआ है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को अलग-अलग पत्र लिखकर शिकायत की थी। लेकिन कैबिनेट सचिवालय ने इन पत्रों को आधिकारिक शिकायत नहीं माना और कार्रवाई नहीं की।
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