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समुद्री सुरक्षा मजबूत करने पर मंथन, ड्रोन-यूएवी खतरों से निपटने की रणनीति पर चर्चा

SHIDDHANT
22 May 2026 8:17 PM IST
समुद्री सुरक्षा मजबूत करने पर मंथन, ड्रोन-यूएवी खतरों से निपटने की रणनीति पर चर्चा
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Delhi दिल्ली। भारत की समुद्री सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम उच्चस्तरीय बैठक अहमदाबाद में आयोजित की गई। यहां तटरक्षक बल, नौसेना, वायुसेना व इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी मौजूद रहे। भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि की अध्यक्षता में यह ऑफशोर सिक्योरिटी कोऑर्डिनेशन कमेटी (ओएससीसी) की 138वीं बैठक थी। इस बैठक में देश के समुद्री क्षेत्रों में मौजूद तेल एवं गैस प्रतिष्ठानों, ऊर्जा प्लेटफॉर्म्स और अन्य महत्वपूर्ण ऑफशोर संपत्तियों की सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा की गई। बैठक में ड्रोन और मानव रहित प्रणालियों से संभावित सुरक्षा चुनौतियों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
गौरतलब है कि समुद्री सीमाओं और ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा केवल पारंपरिक तरीकों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए अत्याधुनिक निगरानी तंत्र और तेज प्रतिक्रिया प्रणाली की जरूरत है। समिति ने समुद्री क्षेत्र की निगरानी क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक में अंडमान और निकोबार क्षेत्र में बढ़ रही ऑफशोर खोज गतिविधियों के कारण सुरक्षा जिम्मेदारियां की चुनौतियां पर भी चर्चा हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय तटरक्षक बल, भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, इंटेलिजेंस ब्यूरो, डीजी शिपिंग, महानिदेशक हाइड्रोग्राफर, ऑयल एंड नेचुरल गैस आयोग तथा विभिन्न राज्यों की पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत के समुद्री क्षेत्रों में स्थित ऑफशोर प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण ऊर्जा अवसंरचना की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना तथा उसे और अधिक मजबूत बनाना था। बैठक के दौरान समुद्री सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। समुद्री क्षेत्र की निगरानी के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी विचार किया गया। इस बात पर भी विचार-विमर्श किया कि बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य के बीच भारत की ऑफशोर संपत्तियों को किस प्रकार सुरक्षित रखा जाए। बैठक में आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप और ड्रोन तथा मानव रहित प्रणालियों से उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों पर भी गंभीर चर्चा हुई।
इसके साथ ही अंडमान और निकोबार क्षेत्र में बढ़ रही ऑफशोर खोज एवं ऊर्जा गतिविधियों के मद्देनजर सुरक्षा चुनौतियों का आकलन किया गया। बैठक के अंत में सभी संबंधित एजेंसियों और हितधारकों ने भारत की ऑफशोर संपत्तियों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण समुद्री अवसंरचना की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आपसी सहयोग और समन्वय को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह बैठक भारत की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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