
नई दिल्ली। देश में प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार सुधारों की मांग उठती रही है। इसी कड़ी में प्रो. राव ने परीक्षा प्रणाली में बदलाव को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रश्न बैंक, परीक्षार्थियों को दो अवसर देने की व्यवस्था और द्विस्तरीय परीक्षा प्रणाली जैसे विकल्प अपनाकर परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रभावी बनाया जा सकता है।
प्रो. राव के अनुसार, वर्तमान समय में परीक्षाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं, ऐसे में प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा परिणाम जारी करने तक पूरी प्रक्रिया को बेहतर बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि डिजिटल प्रश्न बैंक तैयार किया जाना चाहिए, जिसमें विभिन्न विषयों के प्रमाणिक और गुणवत्तापूर्ण प्रश्नों का संग्रह हो।
उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रश्न बैंक की मदद से प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है। इससे प्रश्नों की गुणवत्ता में सुधार होगा और परीक्षा में समान स्तर बनाए रखने में मदद मिलेगी। साथ ही, डिजिटल प्रणाली के जरिए प्रश्नों की समीक्षा और अपडेट करना भी आसान हो जाएगा।
प्रो. राव ने परीक्षा में अभ्यर्थियों को दो मौके देने के विकल्प पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि कई बार प्रतिभाशाली विद्यार्थी तनाव, स्वास्थ्य समस्या या अन्य परिस्थितियों के कारण अपना बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते। ऐसे में दो अवसर मिलने से उन्हें अपनी क्षमता साबित करने का एक और मौका मिलेगा।
उन्होंने कहा कि दो बार परीक्षा देने की व्यवस्था से छात्रों पर मानसिक दबाव कम होगा और वे अधिक आत्मविश्वास के साथ परीक्षा में भाग ले सकेंगे। इससे केवल एक दिन के प्रदर्शन के आधार पर किसी अभ्यर्थी का भविष्य तय करने की समस्या भी कम होगी।
इसके अलावा प्रो. राव ने द्विस्तरीय परीक्षा प्रणाली को भी एक बेहतर विकल्प बताया। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक स्तर पर सामान्य योग्यता और बुनियादी ज्ञान की जांच की जा सकती है, जबकि दूसरे स्तर की परीक्षा में विषय की गहराई और विशेषज्ञता को परखा जा सकता है। इससे योग्य उम्मीदवारों का चयन अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि कई देशों में परीक्षा प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए अलग-अलग चरणों वाली व्यवस्था अपनाई जाती है। भारत में भी बढ़ती प्रतियोगिता और लाखों उम्मीदवारों की संख्या को देखते हुए परीक्षा प्रणाली में बदलाव जरूरी हो गया है।
प्रो. राव ने यह भी कहा कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शिक्षा और परीक्षा क्षेत्र में बढ़ाया जाना चाहिए। ऑनलाइन सिस्टम, डिजिटल मूल्यांकन और डेटा आधारित निगरानी से परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है। इससे गलतियों और अनियमितताओं को कम करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सभी पक्षों को साथ लेकर चलने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, केवल परीक्षा का तरीका बदलना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पाठ्यक्रम, मूल्यांकन प्रणाली और तैयारी के तरीकों में भी सुधार आवश्यक है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्रश्न बैंक और आधुनिक परीक्षा प्रणाली से छात्रों को बेहतर अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, इसके लिए मजबूत तकनीकी ढांचे और उचित निगरानी व्यवस्था की जरूरत होगी।
देश में लगातार बढ़ती प्रतियोगी परीक्षाओं और लाखों युवाओं की भागीदारी को देखते हुए परीक्षा सुधार एक अहम मुद्दा बन चुका है। प्रो. राव के सुझावों को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। डिजिटल प्रश्न बैंक, दो अवसर और द्विस्तरीय परीक्षा प्रणाली लागू होने से परीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बन सकती है।
अब यह देखना होगा कि सरकार और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाएं इन सुझावों पर किस तरह विचार करती हैं और भविष्य में परीक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाते हैं।





