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CJP आंदोलन पर ध्रुव राठी का बयान, राजनीतिक दलों से मिलकर विरोध करने की अपील
jantaserishta.com
12 Oct 2026 3:15 PM IST

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नई दिल्ली: यूट्यूबर ध्रुव राठी ने साफ किया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और संस्थाओं की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में उनकी भागीदारी व्यक्तिगत है। उन्होंने कहा कि वह न तो किसी राजनीतिक दल में शामिल होने आए हैं और न ही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सदस्य के तौर पर इस आंदोलन का हिस्सा बने हैं।
राठी के मुताबिक, यह मामला उनके लिए गंभीर है और इस पर केवल इंटरनेट या वीडियो के जरिए अपनी राय रखना पर्याप्त नहीं लगा। उनका मानना है कि कुछ मुद्दों पर अपनी बात रखने के लिए लोगों के बीच जाकर विरोध प्रदर्शन में शामिल होना भी जरूरी है।
SIR और संस्थाओं की स्वतंत्रता को बताया अहम मुद्दा
ध्रुव राठी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के साथ देश की प्रमुख संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अदालत को भी इस मामले पर ध्यान देना चाहिए और यह देखना चाहिए कि देश की संस्थाओं के पास कितनी स्वतंत्रता और अधिकार हैं।
राठी ने मीडिया, न्यायपालिका और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं पर दबाव बनाए जाने के आरोपों का जिक्र किया। उन्होंने बिना नाम लिए दो लोगों पर देश की संस्थाओं को अपने प्रभाव में लेने की कोशिश करने का आरोप लगाया। राठी ने पुलिस को भी इस कथित दबाव से अछूता नहीं बताया।
उनकी राय में, इस तरह के मामलों पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए और संस्थाओं की भूमिका तथा उनकी स्वतंत्रता से जुड़े सवालों पर विचार किया जाना चाहिए।
केवल वीडियो बनाने के बजाय प्रदर्शन में शामिल होने का फैसला
राठी ने बताया कि वह पश्चिम बंगाल और बिहार के चुनावों सहित कई राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर वीडियो बना चुके हैं। लेकिन इस बार उन्हें लगा कि विषय की गंभीरता को देखते हुए सिर्फ वीडियो बनाकर अपनी बात कहना पर्याप्त नहीं होगा।
इसी वजह से उन्होंने आम नागरिक के तौर पर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण और सामान्य तरीके से होगा तथा लोगों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।
उनका उद्देश्य मौके पर जाकर मुद्दे को समझना और विरोध में अपनी भागीदारी दर्ज कराना था। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आगे होने वाले प्रदर्शनों में शामिल होने को लेकर अभी उनकी कोई निश्चित योजना नहीं है।
राठी ने अपने बयान में यह भी दावा किया कि उनके घर के आसपास करीब 50 लोग तैनात रहते हैं, जो उनकी तस्वीरें लेते हैं और उनकी गतिविधियों पर नजर रखते हैं। उनके अनुसार, उन्हें अनौपचारिक रूप से चेतावनी दी गई थी कि प्रदर्शन में शामिल होने पर उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है। ये उनके द्वारा लगाए गए आरोप हैं।
ध्रुव राठी ने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों को अलग-अलग दिन प्रदर्शन करने के बजाय एक साथ आवाज उठानी चाहिए। उनके मुताबिक, दलों के बीच आपसी मतभेद और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा हो सकती है, लेकिन गंभीर विषयों पर मिलकर काम करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि सभी राजनीतिक दल और आम नागरिक एक साथ विरोध दर्ज कराते हैं, तो उनकी मांगों पर ध्यान देने के लिए दबाव बनाया जा सकता है।
राठी ने यह भी बताया कि उन्होंने खुद पहल करते हुए अभिषेक को फोन किया था। उनके मुताबिक, अभिषेक ने उन्हें आंदोलन में आने का सुझाव दिया था। साथ ही, बंगलूरू जाकर अभिनेता प्रकाश राज के कार्यक्रम में शामिल होने की बात भी कही थी, जहां मतदाता सूची से हटाए गए लोगों से जुड़े मुद्दे को समझने का अवसर मिल सकता था।
राठी ने दोहराया कि उनका इस विषय से जुड़ाव व्यक्तिगत है और इसे किसी राजनीतिक दल के साथ उनके संबंध के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
हिरासत के दौरान पुलिसकर्मियों के कामकाज पर जताई चिंता
ध्रुव राठी ने हिरासत में बिताए 24 घंटों के अनुभव को साझा करते हुए पुलिसकर्मियों की कार्य परिस्थितियों पर भी बात की। उन्होंने बताया कि इस दौरान कुछ पुलिसकर्मियों ने उन्हें अपनी नौकरी, काम के दबाव और परिस्थितियों के बारे में जानकारी दी।
राठी ने कहा कि वह केवल एक दिन हिरासत में रहे, जबकि पुलिसकर्मियों को अपनी पूरी नौकरी के दौरान लगातार जिम्मेदारियों और प्रतिबंधों के बीच काम करना पड़ता है। उन्होंने उनकी तुलना ऐसे लोगों से की, जो लंबे समय तक बंधन जैसी परिस्थितियों में जीवन बिताते हैं।
उन्होंने पुलिसकर्मियों के काम के बोझ और वेतन को लेकर भी चिंता जताई। राठी के मुताबिक, उनसे बातचीत करने के बाद पुलिसकर्मियों की परिस्थितियों को लेकर उनके मन में सहानुभूति पैदा हुई। इस तरह ध्रुव राठी ने अपने बयान में आंदोलन में शामिल होने की वजह, राजनीतिक दलों सेअपनी दूरी, संस्थाओं की स्वतंत्रता से जुड़े सवालों और पुलिसकर्मियों की कार्य परिस्थितियों पर अपना पक्ष रखा।
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