भारत

दिल्ली शब्दोत्सव 2026: कार्यक्रम में वक्ता बोले, शब्द ही हमारी संस्कृति की पहचान

jantaserishta.com
3 Jan 2026 5:00 PM IST
दिल्ली शब्दोत्सव 2026: कार्यक्रम में वक्ता बोले, शब्द ही हमारी संस्कृति की पहचान
x
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित शब्दोत्सव 2026 के दूसरे दिन साहित्य, संस्कृति, कला और विचारों का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। इस आयोजन में देश के जाने-माने लेखक, संपादक, कलाकार और विचारक शामिल हुए, जिन्होंने शब्दों की शक्ति, भारतीय संस्कृति और संवाद की अहमियत पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम में आरएसएस दिल्ली प्रांत के महासचिव अनिल गुप्ता ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से शब्दोत्सव की सराहना करते हुए कहा कि यह एक बेहद शानदार आयोजन है। जो लोग शब्दों की ताकत को नहीं समझते, वे यह नहीं जान पाते कि सिर्फ शब्दों के जरिए कितना कुछ कहा जा सकता है।
उन्होंने पूरे आयोजन से जुड़ी टीम को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने असाधारण काम किया है। पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर ने शब्दोत्सव के नाम और उसकी भावना पर बात करते हुए कहा कि 'शब्दोत्सव' नाम ही इसका उद्देश्य बताता है। अक्षर ध्वनियां होती हैं, जिन्हें नष्ट नहीं किया जा सकता। जब ये ध्वनियां शब्दों में ढलती हैं, तो भावनाएं पैदा होती हैं। भावनाएं विचारों को जन्म देती हैं और विचार संवाद, बहस और अंतर्मंथन का रास्ता खोलते हैं। इन कथाओं को समझने के लिए शब्दों की यात्रा जरूरी है।
इस आयोजन में कथक नृत्यांगना रिचा गोविल ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि वह पिछले 12 वर्षों से एक एनजीओ चला रही हैं, जो कथक सहित अन्य शास्त्रीय नृत्य कलाओं से जुड़ा है। रिचा ने कहा कि बचपन में उन्होंने देखा कि इन कलाओं को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है, इसलिए उनका प्रयास रहा है कि इन पारंपरिक कलाओं को आगे बढ़ाया जाए और नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए।
लेखिका अमी गणात्रा ने शब्दोत्सव को बेहद शानदार बताया। उन्होंने कहा कि यहां कई विषयों पर उत्कृष्ट वक्ताओं ने अपने विचार रखे। आज के समय में हर तरह के दृष्टिकोण को सुनना जरूरी है, क्योंकि संवाद के बिना समाज आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने शब्दोत्सव की टैगलाइन का उल्लेख करते हुए कहा कि शब्दों के माध्यम से ही सत्य का बोध होता है।
वरिष्ठ लेखक विजय भटनागर ने कहा कि शब्दोत्सव हमारी संस्कृति और सभ्यता को समझने और उस पर अपने विचार व्यक्त करने का एक बेहतरीन अवसर है। उन्होंने कहा कि हम अक्सर कहते हैं कि हमें अपने हिंदू होने पर गर्व है, लेकिन सवाल यह है कि यह गर्व किस बात का है। उनकी पुस्तक को पढ़कर आज की पीढ़ी को अपने धर्म और संस्कृति की सही समझ मिलेगी और उनमें स्वाभाविक गर्व पैदा होगा।
लेखिका लोकेश चौधरी ने बताया कि उनकी हाल ही में आई पुस्तक 'जननी, जन्मभूमि और जज्बात' है। उन्होंने शब्दोत्सव को शब्दों का महाकुंभ बताते हुए कहा कि यहां हर व्यक्ति अपनी रुचि के अनुसार पुस्तकें चुन सकता है। साहित्य के माध्यम से हम अपनी संस्कृति को बचा रहे हैं।
नाड़ी ज्योतिष संजीव श्रीवास्तव ने कार्यक्रम में कहा कि ऐसे आयोजन लगातार होने चाहिए। उन्होंने ज्योतिष के अनुसार कहा कि यह वर्ष भारत में अध्यात्म के क्षेत्र में उभार लेकर आएगा और शिक्षा सुधार के लिए भी याद किया जाएगा। वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल बनी रहेगी, लेकिन अध्यात्म लोगों को शक्ति देगा।
jantaserishta.com

jantaserishta.com

भारत के भले ही किसी कोने में आप रह रहे हों, जनता से रिश्ता वेबसाइट पर आपके राज्य की हर छोटी-बड़ी खबर मिलेगी। राजनीति, खेल, चुनाव, बिजनेस, सिनेमा, इस प्लैटफॉर्म पर बस एक क्लिक करते ही हमेशा पाएं ताजा खबरें। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल समेत देश के बाकी राज्यों और शहरों की कोई जानकारी हो, हम आपको देते हैं। सियासी रण हो या बजट का मौसम, कहां चल रहा क्या सियासी दांव-पेच, आपके गांव में किसकी सरकार, हर अपडेट यहां आपको मिलेंगे। तो फिर अपने राज्य की हर हलचल के लिए जुड़े रहिए जनता से रिश्ता के साथ।

    Next Story
    null