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दिल्ली ब्लास्ट आरोपी जावेद सिद्दीकी पर 2 करोड़ रुपए की ठगी का आरोप
Shantanu Roy
20 Nov 2025 7:52 PM IST

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Bhopal. भोपाल। दिल्ली ब्लास्ट के आरोपी और अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जावेद सिद्दीकी पर 24 साल पुराना ठगी मामला फिर चर्चा में है। जानकारी के अनुसार, जावेद सिद्दीकी और उनके भाई हमूद सिद्दीकी के खिलाफ भोपाल में करीब 2 करोड़ रुपए की ठगी का केस दर्ज है। दोनों लंबे समय से फरार थे और पुलिस की पकड़ से दूर थे। वहीं, हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जावेद सिद्दीकी को दिल्ली ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार किया। पुलिस जांच के अनुसार, जावेद और हमूद सिद्दीकी ने 1997 से 2001 के बीच भोपाल में लोगों को ठगने का काम किया। उन्होंने एक चिटफंड कंपनी खोली और लोगों को लालच दिया कि उनके पैसे दोगुने कर देंगे। आरोप है कि उन्होंने ठगी के पैसे मुस्लिम समुदाय के लोगों से हासिल किए और आतंकवादी गतिविधियों में लगाए। 2001 तक जनता को चूना लगाकर दोनों भाई फरार हो गए।
इस संबंध में तलैया और शाहजहानाबाद थानों में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। आरोप है कि गैस पीड़ितों के पैसे भी इस ठगी में शामिल थे। जावेद सिद्दीकी ने इस मामले में अग्रिम जमानत ले रखी थी, जबकि हमूद सिद्दीकी को पहले ही कोर्ट ने बरी कर दिया था। इसके अलावा, इनके खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में धोखाधड़ी और चिटफंड के कई केस भी दर्ज हैं। मामले में प्रार्थी जुनेद कुरैशी ने 5 दिसंबर 1999 को शाहजहानाबाद थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि कंपनी ने 1998 में उनके और अन्य लोगों के जमा किए पैसे हड़प लिए। जुनेद ने बताया कि उसने 15 जून और 15 नवंबर 1998 को कुल 75,000 रुपए जमा किए थे, लेकिन कंपनी के पदाधिकारी कार्यालय बंद कर फरार हो गए। शिकायत पर एफआईआर 7 दिसंबर 1999 को दर्ज की गई। जांच में पता चला कि कुल 147 लोग प्रभावित हुए और लगभग 15.32 लाख रुपए की ठगी हुई। जांच और अभियोग पत्र के अनुसार, कुल 24 आरोपी थे।
जिनमें हमूद सिद्दीकी, हुस्ना सिद्दीकी, सूबा सिंह, शाहबुद्दीन चौधरी, मसूद अहमद, जेबा सिद्दीकी, परवीन सुल्तान और अन्य शामिल हैं। इनमें कुछ आरोपी गिरफ्तार हुए, जबकि अधिकांश फरार हैं। पुलिस लगातार फरार आरोपियों के पते पर रेड डाल रही है और सूचना देने वाले को 5,000 से 10,000 रुपए का ईनाम घोषित किया गया है। फरार आरोपियों की संपत्ति की जानकारी जुटाई जा रही है, लेकिन कई के पास कोई चल-अचल संपत्ति का रिकॉर्ड नहीं मिला। न्यायालय में इस मामले की पेशी 29 अगस्त 2019 को तय थी। इस दौरान 24 आरोपियों में से एक की मौत हो चुकी थी और एक आरोपी के खिलाफ प्रकरण वापस कर दिया गया था। बाकी आरोपियों में कुछ को न्यायालय में पेश किया गया, जबकि 16 आरोपी अभी भी फरार हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जावेद सिद्दीकी की गिरफ्तारी से मामले की जांच में तेजी आएगी और फरार आरोपियों को पकड़ने के प्रयास भी तेज होंगे। ठगी, चिटफंड और आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े इस प्रकरण में जल्द ही न्यायिक कार्रवाई पूरी करने की कोशिश की जा रही है। यह मामला न केवल भोपाल में ठगी और चिटफंड के इतिहास को उजागर करता है बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे लंबे समय तक फरार आरोपी न्याय की पकड़ से बच सकते हैं, और कानून व्यवस्था के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई कितनी जरूरी है।
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