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रक्षा मंत्रालय रिश्वत मामला: लेफ्टिनेंट कर्नल और निजी व्यक्ति गिरफ्तार

SHIDDHANT
20 Dec 2025 11:26 PM IST
रक्षा मंत्रालय रिश्वत मामला: लेफ्टिनेंट कर्नल और निजी व्यक्ति गिरफ्तार
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Delhi दिल्ली: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय में तैनात लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार शर्मा और एक निजी व्यक्ति विनोद कुमार को रिश्वतखोरी के एक बड़े मामले में गिरफ्तार किया है। दोनों की गिरफ्तारी 20 दिसंबर 2025 को की गई। CBI ने यह मामला 19 दिसंबर को विश्वसनीय सूचना के आधार पर दर्ज किया था। अधिकारियों के अनुसार, लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार शर्मा, जो रक्षा उत्पादन विभाग में डिप्टी प्लानिंग ऑफिसर (इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड एक्सपोर्ट्स) के पद पर कार्यरत हैं, कथित रूप से निजी रक्षा कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले नियमित रूप से रिश्वत लेते थे। इस साजिश में उनकी पत्नी कर्नल काजल बाली की भी भूमिका की जांच की जा रही है, जो श्रीगंगानगर, राजस्थान में 16वीं इन्फैंट्री डिवीजन ऑर्डनेंस यूनिट की कमांडिंग ऑफिसर हैं।
जांच में सामने आया कि दुबई स्थित एक कंपनी के भारत संचालन से जुड़े राजीव यादव और रवजीत सिंह बेंगलुरु से लगातार लेफ्टिनेंट कर्नल के संपर्क में थे। इनके कहने पर 18 दिसंबर 2025 को विनोद कुमार ने लेफ्टिनेंट कर्नल को 3 लाख रुपये की रिश्वत दी। जांच के दौरान CBI ने दिल्ली, श्रीगंगानगर, बेंगलुरु, जम्मू और अन्य स्थानों पर छापेमारी की। दिल्ली स्थित लेफ्टिनेंट कर्नल के आवास से 3 लाख रुपये की रिश्वत राशि और 2.23 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए। श्रीगंगानगर स्थित आवास से 10 लाख रुपये नकद और कई आपत्तिजनक दस्तावेज भी जब्त किए गए। नई दिल्ली स्थित कार्यालय परिसर में भी तलाशी जारी है।
दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 23 दिसंबर 2025 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। CBI ने बताया कि मामले की आगे की जांच जारी है और अन्य संभावित आरोपियों की पहचान पर भी काम चल रहा है। इस गिरफ्तारी ने रक्षा उत्पादन विभाग में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामलों पर नई रोशनी डाली है। CBI का कहना है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी और विधिक प्रक्रिया के अनुसार की जा रही है। एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामलों को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। रक्षा मंत्रालय में यह कार्रवाई न केवल विभाग में अनुशासन और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, बल्कि यह सरकार की भ्रष्टाचार-रोधी नीति का भी संदेश देती है।
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