भारत

चुनाव याचिका दायर करने की समयसीमा पर फैसला

Shantanu Roy
17 Oct 2026 7:15 PM IST
चुनाव याचिका दायर करने की समयसीमा पर फैसला
x
Shimla. शिमला। हाईकोर्ट ने पंचायत चुनावों में चुनाव याचिका दायर करने की समय सीमा को लेकर एक बेहद महत्त्वपूर्ण और नजीर बनने वाला कानूनी फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई चुनाव याचिका तय समय सीमा के बाद दायर की जाती है, तो अदालत या सक्षम प्राधिकारी के पास उस देरी को माफ करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। ऐसी स्थिति में याचिका को सीधे खारिज किया जाना चाहिए। न्यायाधीश संदीप शर्मा ने चंबा जिले की एक ग्राम पंचायत प्रधान की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया।

शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पंचायत चुनावों से जुड़ी चुनाव याचिकाओं की समय सीमा को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पंचायत चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका निर्धारित अवधि के भीतर दाखिल करना अनिवार्य है। यदि संबंधित कानून में देरी माफ करने का प्रावधान नहीं है, तो सक्षम प्राधिकारी समय सीमा समाप्त होने के बाद दाखिल याचिका में देरी को माफ नहीं कर सकता। न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने चंबा जिले की एक ग्राम पंचायत प्रधान से जुड़े चुनावी विवाद की सुनवाई करते हुए यह व्यवस्था स्पष्ट की है।

यह मामला हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की सलूणी तहसील स्थित ग्राम पंचायत ठाकरिमट्टी से संबंधित है। पंचायत चुनाव में संतोष कुमारी ने 597 मत प्राप्त कर जीत हासिल की थी, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को 561 वोट मिले थे। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद पराजित प्रत्याशी ने चुनाव को चुनौती देते हुए संबंधित प्राधिकारी के समक्ष याचिका दाखिल की। इसके बाद 23 सितंबर 2026 को उपमंडल अधिकारी ने चुनाव याचिका स्वीकार करते हुए संतोष कुमारी का निर्वाचन निरस्त कर दिया और प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी को निर्वाचित घोषित किया।

संतोष कुमारी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए उपायुक्त चंबा के समक्ष अपील की। उनका तर्क था कि चुनाव याचिका निर्धारित 30 दिनों की समय सीमा समाप्त होने के बाद दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि चुनाव परिणाम 26 मई 2021 को घोषित हुआ था, जबकि उसे चुनौती देने वाली याचिका 8 जुलाई 2021 को दाखिल की गई। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 के तहत निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद संबंधित प्राधिकारी को देरी माफ करने का अधिकार नहीं है।

न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि चुनाव याचिका की समय सीमा का प्रश्न प्रारंभिक स्तर पर जांचा जाना आवश्यक है। अदालत ने कहा कि यदि किसी चुनाव याचिका को निर्धारित अवधि के बाद दाखिल किया गया है और कानून में देरी माफ करने का प्रावधान नहीं है, तो संबंधित प्राधिकारी को उस याचिका की स्वीकार्यता पर निर्णय लेना होगा। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि समय सीमा का प्रश्न संबंधित पक्ष द्वारा शुरुआत में नहीं उठाए जाने के बावजूद सक्षम प्राधिकारी इसकी जांच कर सकता है।

हाईकोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। अदालत ने उपायुक्त चंबा को निर्देश दिया है कि वे दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर देकर चुनाव याचिका की समय सीमा से जुड़े विवाद पर प्राथमिकता से निर्णय लें। इसके लिए लगभग 10 सप्ताह की अवधि निर्धारित की गई है। इस प्रकार हाईकोर्ट ने समय सीमा से जुड़े कानूनी सिद्धांत को स्पष्ट किया है, लेकिन संबंधित चुनाव याचिका समय-सीमा के कारण खारिज होगी या नहीं, इसका निर्णय अभी संबंधित अपीलीय प्राधिकारी को करना है।
Next Story