
x
Hyderabad हैदराबाद। तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो (टीजीसीएसबी) की एंटी-पायरेसी यूनिट ने सोमवार को सिनेमाघरों में फिल्म स्क्रीनिंग से पहले दिखाए जाने वाले नए एंटी-पायरेसी डिस्क्लेमर और फिल्म पायरेसी मामलों की जांच के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) लॉन्च की।
इस डिस्क्लेमर का उद्देश्य दर्शकों को फिल्म पायरेसी के कानूनी परिणामों के बारे में जागरूक करना है। साथ ही सिनेमाघरों में कैमकॉडिंग (फिल्म की अवैध रिकॉर्डिंग) के खिलाफ अभियान भी शुरू किया गया है।
टीजीसीएसबी की निदेशक शिखा गोयल और तेलुगु फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स (टीएफसीसी) के अध्यक्ष दग्गुबाती सुरेश बाबू ने इस पहल का औपचारिक शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम टीजीसीएसबी और टीएफसीसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक परामर्श बैठक के दौरान किया गया, जिसका उद्देश्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों और फिल्म उद्योग के बीच सहयोग बढ़ाकर डिजिटल पायरेसी की चुनौती से निपटना है।
जनवरी में टीजीसीएसबी ने टीएफसीसी के साथ मिलकर फिल्म पायरेसी पर अंकुश लगाने के लिए एक एंटी-पायरेसी यूनिट भी स्थापित की थी।
बैठक में उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने फिल्म पायरेसी के दायरे और उसके प्रभाव पर चर्चा की। टीजीसीएसबी के अनुसार, उद्योग के अनुमान बताते हैं कि तेलुगु फिल्म उद्योग को हर साल लगभग 3,700 करोड़ रुपये और भारतीय फिल्म उद्योग को 22,400 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पायरेसी के कारण होता है।
जांच में सामने आया है कि पायरेसी मुख्य रूप से दो स्रोतों से होती है- फिल्म रिलीज से पहले पोस्ट-प्रोडक्शन या डिजिटल सेवा प्रदाता स्तर पर एचडी क्वालिटी कंटेंट का लीक होना और सिनेमाघरों में फिल्म की कैमकॉडिंग, जो अधिकांश मामलों के लिए जिम्मेदार है।
शिखा गोयल ने बताया कि नई एसओपी में पायरेसी मामलों की जांच के लिए विस्तृत ढांचा तय किया गया है। इसमें कॉपीराइट एक्ट, सिनेमैटोग्राफ एक्ट और आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने, पायरेटेड कंटेंट की फॉरेंसिक जांच, वॉटरमार्किंग और सर्वर डेटा विश्लेषण के जरिए स्रोत थिएटर की पहचान, डिजिटल सेवा प्रदाताओं के साथ समन्वय, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने और आईटी नियमों के तहत उल्लंघनकारी यूआरएल ब्लॉक करने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
बैठक के दौरान लॉन्च किया गया एंटी-पायरेसी डिस्क्लेमर देशभर के सिनेमाघरों में फिल्म स्क्रीनिंग से पहले दिखाया जाएगा और इसे डिजिटल सेवा प्रदाताओं व प्रदर्शकों के स्क्रीनिंग पैकेज में भी शामिल किया जाएगा।
इस डिस्क्लेमर में दर्शकों को चेतावनी दी जाएगी कि फिल्म पायरेसी या बिना अनुमति फिल्म रिकॉर्ड करना दंडनीय अपराध है, जिसके लिए तीन साल तक की सजा, तीन लाख रुपये तक का जुर्माना या फिल्म की उत्पादन लागत का 5 प्रतिशत तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
Tagsतेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरोटीजीसीएसबीएंटी-पायरेसीफिल्म पायरेसीएसओपीसिनेमाघरकैमकॉडिंगडिजिटल सुरक्षाशिखा गोयलदग्गुबाती सुरेश बाबूटीएफसीसीएफआईआरवॉटरमार्किंगभारतीय फिल्म उद्योगकानूनी कार्रवाईजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारहिंन्दी समाचारजनताJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperjantasamachar newssamacharHindi news
Next Story





