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Operation Octopus 2.0: साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़, 32 बैंक अधिकारी समेत 52 गिरफ्तार

SHIDDHANT
19 April 2026 9:27 PM IST
Operation Octopus 2.0: साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़, 32 बैंक अधिकारी समेत 52 गिरफ्तार
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भंडाफोड़
Hyderabad हैदराबाद। हैदराबाद सिटी पुलिस ने देशभर में फैले साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 9 राज्यों में 52 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 32 बैंक अधिकारी भी शामिल हैं। पुलिस आयुक्त वीसी सज्जनार ने रविवार को बताया कि 'ऑपरेशन ऑक्टोपस 2.0' के तहत यह बड़ी कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि अनुभवी जांचकर्ताओं की 16 विशेष टीमों ने 7 दिनों तक 9 राज्यों में एक साथ अभियान चलाया। इसमें 52 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 32 बैंक अधिकारी शामिल हैं, जो इस ठगी में अहम भूमिका निभा रहे थे।
गिरफ्तार बैंक अधिकारियों में तमाम बैंक से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। पुलिस ने 15 ऐसे खाताधारकों को भी गिरफ्तार किया है, जिन्होंने जानबूझकर अपने बैंक खातों का इस्तेमाल अवैध पैसे के लेन-देन के लिए दिया था। इसके साथ ही 5 ऐसे बिचौलियों (एग्रीगेटर) को भी पकड़ा गया, जो इन खातों की व्यवस्था करते थे और पैसे को मुख्य आरोपियों तक पहुंचाने में मदद करते थे। छापेमारी के दौरान 26 मोबाइल फोन, 14 चेक बुक, 2 पेन ड्राइव, 1 लैपटॉप और 21 शेल कंपनियों की मुहरें बरामद की गईं।
पुलिस आयुक्त ने बताया कि हाल के दिनों में निवेश घोटाले, ट्रेडिंग फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराध तेजी से बढ़े हैं, जिनमें ठग लोगों को डराकर और बहलाकर बड़ी रकम ठग लेते हैं। इसी को देखते हुए पहले 'ऑपरेशन ऑक्टोपस-1' चलाया गया था, जिसमें 16 राज्यों में 32 टीमों ने कार्रवाई कर 117 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उस दौरान 350 बैंक खातों का खुलासा हुआ था, जो देशभर के करीब 850 मामलों से जुड़े थे और इनमें लगभग 150 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ था।
अब 'ऑपरेशन ऑक्टोपस 2.0' में खास तौर पर बैंक अधिकारियों की भूमिका पर फोकस किया गया, जो फर्जी खातों (म्यूल अकाउंट) खोलने में शामिल पाए गए। यह अभियान महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और बिहार में चलाया गया। पुलिस ने यह भी पाया कि निजी बैंकिंग सेक्टर में ऐसे फर्जी खाते ज्यादा खोले जा रहे हैं, जो केवाईसी प्रक्रिया में लापरवाही की वजह से संभव हो रहा है। कई मामलों में ग्राहकों की सही जांच किए बिना ही खाते खोल दिए गए, जिनका इस्तेमाल बाद में साइबर ठगी में किया गया।
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