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क्राइम ब्रांच ने फर्जी पुलिसकर्मी को पकड़ा, ढूंढता था चोरी का मोबाइल

Nil dhankar
24 Jun 2026 12:35 PM IST
क्राइम ब्रांच ने फर्जी पुलिसकर्मी को पकड़ा, ढूंढता था चोरी का मोबाइल
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मुंबई। मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट 12 ने एक ऐसे शातिर जालसाज को गिरफ्तार किया है, जो असली पुलिस से भी तेज रफ्तार में चोरी के मोबाइल ढूंढ निकालता था। हालांकि उसका यह परोपकार कोई समाजसेवा नहीं बल्कि अवैध वसूली और धोखाधड़ी का बड़ा जरिया था। आरोपी खुद को क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर संजय बताकर लोगों को डराता था और मोबाइल ढूंढने के बदले फोन की कीमत का 20 प्रतिशत तक कमीशन वसूलता था। पुलिस का अनुमान है कि उसने अब तक 200 से अधिक लोगों को उनके खोए हुए मोबाइल वापस दिलाए हैं और उनसे कमीशन वसूला है।

क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि जोगेश्वरी वेस्ट का रहने वाला हनजमा मुबारक पाशा सैयद (30) नाम का व्यक्ति फर्जी पुलिसवाला बनकर मोबाइल रिकवरी का नेटवर्क चला रहा है। सटीक इनपुट के आधार पर पुलिस ने जोगेश्वरी वेस्ट में एक पेट्रोल पंप के पास जाल बिछाया और सैयद को धर दबोच लिया। सैयद के पास से दो मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं, जिनमें 30 अलग-अलग मोबाइलों के स्क्रीनशॉट मिले हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि सैयद इंस्टाग्राम पर सेलिफर नाम से एक अकाउंट चलाता था, जहां वह खोए हुए मोबाइल रिकवर करने का विज्ञापन देता था। जिन लोगों के फोन चोरी हो जाते थे, वे इस विज्ञापन को देखकर उससे संपर्क करते थे। कुछ मामलों में वह खुद भी ऑनलाइन पीड़ितों से संपर्क साधता था।

सैयद सबसे पहले पीड़ित से मोबाइल का आईएमईआई नंबर लेता था। एडवांस्ड तकनीकी टूल्स और मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर हेल्पलाइन की मदद से वह पता लगा लेता था कि उस हैंडसेट में फिलहाल कौन सा सिम कार्ड एक्टिव है। उसका साथी गौरव परिहार नए यूजर को एक खरीदार बनकर फोन करता था और बातों-बातों में उसका नाम-पता हासिल कर लेता था। गौरव फिलहाल फरार है और मुंबई से बाहर है। पूरी डिटेल मिलने के बाद सैयद इंस्पेक्टर संजय बनकर नए यूजर को फोन करता था। वह उसे कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर फोन सरेंडर करने का दबाव बनाता था। डर के मारे जब नया यूजर फोन सौंप देता था, तो सैयद उसे असली मालिक को लौटा देता था। इसके बदले वह मालिक से फोन की कुल कीमत का 15 से 20 फीसदी हिस्सा (लगभग 10,000 से 25,000 रुपये) फीस के रूप में लेता था। क्राइम ब्रांच के अधिकारियों का कहना है कि भले ही इस नेटवर्क ने कई लोगों के फोन वापस दिलाए हों, लेकिन यह पूरी प्रक्रिया अवैध थी। इसमें फर्जीवाड़ा, डेटा का अनधिकृत इस्तेमाल और जबरन वसूली शामिल है। पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि आरोपी के पास टेलीकॉम कंपनियों या मोबाइल इकोसिस्टम के संवेदनशील डेटा तक पहुंच कैसे बनी? क्या इसमें किसी टेलीकॉम कंपनी के कर्मचारी की मिलीभगत है? मामले की आगे की जांच जारी है।

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