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प्राइवेट जॉब में स्थानीय लोगों को आरक्षण पर अदालत ने लगाई रोक, सरकार को बड़ा झटका!

jantaserishta.com
3 Feb 2022 12:52 PM IST
प्राइवेट जॉब में स्थानीय लोगों को आरक्षण पर अदालत ने लगाई रोक, सरकार को बड़ा झटका!
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चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा डोमेसाइल जॉब रिजर्वेशन पर रोक लगा दी है. हाईकोर्ट ने निजी नौकरियों में हरियाणा के नागरिकों के आरक्षण के 75 प्रतिशत पर रोक लगाई है. हरियाणा उद्योग संघ ने राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया था. बता दें कि प्राइवेट नौकरियों में आरक्षण के कानून की अधिसूचना हरियाणा में 2021 को ही जारी कर दी गई थी.

हरियाणा राज्य स्थानीय व्यक्ति रोजगार अधिनियम 2020 15 जनवरी से लागू कर दिया गया था. इसकी अधिसूचना 2021 में ही जारी कर दी गई थी. यह कानून 10 साल तक प्रभावी रहने की बात कही गई थी. स्टार्टअप को कानून में 2 साल की छूट रहने की बात भी कही गई थी. साथ ही ITI पास युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने को कहा गया था.
अधिनियम के तहत कहा गया था कि योजना का लाभ हरियाणा के मूल निवासी को ही मिलेगा. इसकी निगरानी उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के उपनिदेशक स्तर के अधिकारी करेंगे. ईंट-भट्ठों पर नियम लागू नहीं होगा. वहां ओडिशा और झारखंड के श्रमिक काम करेंगे, इस तरह के श्रमिक हरियाणा में उपलब्ध नहीं हैं. निर्माण क्षेत्र के कार्यों में पश्चिमी बंगाल के कामगारों को प्राथमिकता रहेगी. इसमें उन्हें महारत हासिल है.
इस कानून के मुताबिक, प्राइवेट कंपनियों, सोसाइटीज, ट्रस्ट, लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप फर्म, पार्टनरशिप फर्म के नियोक्ताओं, कोई भी व्यक्ति जो हरियाणा में निर्माण, व्यवसाय करने या कोई सेवा प्रदान करने के उद्देश्य से वेतन, मजदूरी पर 10 या उससे अधिक व्यक्तियों को काम पर रखता है, पर अधिनियम लागू होगा. हालांकि, पहले यह कोटा 50,000 रुपए तक की मासिक नौकरियों पर था. लेकिन अब इसे घटाकर 30 हजार रुपए कर दिया गया. 2021 मार्च में, हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने हरियाणा सरकार के इस विधेयक को मंजूरी दी थी. इसमें स्थानीय युवाओं को 50,000 रुपये से तक मासिक वेतन वाली निजी क्षेत्र की नौकरियों में 75% आरक्षण मिलेगा.
हरियाणा के उद्योग जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि हरियाणा में काम करने वाले 70 प्रतिशत लोग बाहर से आते हैं और सिर्फ 30 प्रतिशत हरियाणा से हैं. लेकिन अब सरकार इसका उल्टा करने के बोल रही है. इससे भी बड़ा सवाल ये है कि क्या प्राइवेट सेक्टर में स्थानीय लोगों को आरक्षण देना संवैधानिक है? क्या राज्य सरकार ऐसा कर सकती है? संविधान के आर्टिकल 19 के मुताबिक हर नागरिक देश में कहीं भी जाकर किसी भी तरह की नौकरी, व्यापार करने का अधिकार रखता है. भारत में राज्यों की नागरिकता की कोई व्यवस्था नहीं है. राज्य ऐसा कोई प्रतिबंध लागू नहीं कर सकते जिससे एक से दूसरी जगह जाने, किसी पेशे को अपनाने और व्यवसाय करने की स्वतंत्रता खत्म होती हो.


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