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मस्जिद में ‘अश्लील हरकतें’ करने पर कपल का काट दिया सिर, पवित्रता भंग करने का आरोप

Triveni
20 Oct 2026 7:50 AM IST
मस्जिद में ‘अश्लील हरकतें’ करने पर कपल का काट दिया सिर, पवित्रता भंग करने का आरोप
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सऊदी अरब से बांग्लादेश ने मांगा स्पष्टीकरण
नई दिल्ली : सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का में एक मस्जिद के भीतर कथित आपत्तिजनक कृत्य के मामले में बांग्लादेश के दो नागरिकों को मौत की सजा दिए जाने के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक सवाल खड़े हो गए हैं। सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के अनुसार, 14 अक्टूबर को एक बांग्लादेशी पुरुष और महिला को दोषी पाए जाने के बाद उनका सिर काट दिया गया। वहीं बांग्लादेश सरकार ने कहा है कि उसके विदेश मंत्रालय और सऊदी अरब स्थित राजनयिक मिशन को इस मामले की पहले से जानकारी नहीं दी गई थी।बांग्लादेश ने सऊदी अरब से मामले की विस्तृत जानकारी, न्यायिक प्रक्रिया और फैसले से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं। इस मुद्दे को लेकर ढाका में सऊदी राजदूत से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।
मक्का की मस्जिद में आपत्तिजनक कृत्य का आरोप
सऊदी अरब की सरकारी समाचार एजेंसी सऊदी प्रेस एजेंसी के माध्यम से जारी गृह मंत्रालय के बयान के अनुसार, दो बांग्लादेशी नागरिकों पर मक्का की एक मस्जिद में अनुचित और अनैतिक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। दोनों की पहचान नजरुल इस्लाम अब्दुल बशीर और सिटी अख्तर के रूप में हुई है। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने दोनों को गिरफ्तार करने के बाद मामले की जांच की थी। जांच पूरी होने पर आरोपियों को सक्षम अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें दोषी ठहराया गया। अदालत के फैसले को संबंधित न्यायिक प्राधिकरण से मंजूरी मिलने के बाद सजा लागू करने के लिए शाही आदेश जारी किया गया। इसके बाद 14 अक्टूबर को मक्का क्षेत्र में दोनों को मौत की सजा दे दी गई। हालांकि, सऊदी गृह मंत्रालय ने अपने सार्वजनिक बयान में कथित कृत्य की सटीक प्रकृति, संबंधित मस्जिद का नाम और गिरफ्तारी की तारीख स्पष्ट नहीं की थी।
बांग्लादेश ने उठाए सवाल
दो नागरिकों को मौत की सजा दिए जाने के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस मामले में उसे पहले से आधिकारिक जानकारी नहीं मिली थी। बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम के अनुसार, सऊदी अरब स्थित बांग्लादेशी राजनयिक मिशन को न तो कानूनी कार्रवाई के दौरान सूचित किया गया और न ही मौत दिए जाने से पहले जानकारी उपलब्ध कराई गई। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश सरकार को 14 अक्टूबर को मौत की जानकारी मिली। इसके बाद बांग्लादेश ने सऊदी अधिकारियों से संपर्क करके मामले से जुड़े तथ्यों और कानूनी कार्रवाई का विवरण मांगा।
सऊदी राजदूत से मांगा गया स्पष्टीकरण
18 अक्टूबर को बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने ढाका में सऊदी अरब के राजदूत अब्दुल्ला जफर एच. बिन अबियाह के समक्ष मामला उठाया। बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय के द्विपक्षीय मामलों के सचिव एम. नजरुल इस्लाम ने सऊदी राजदूत से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नागरिकों को मौत दिए जाने और पूर्व सूचना नहीं मिलने के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया। बांग्लादेश की ओर से औपचारिक राजनयिक पत्र भी सौंपा गया।
अदालत के फैसले की कॉपी भी मांग रहा बांग्लादेश
19 अक्टूबर को बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने बताया कि सरकार ने सऊदी अरब से न्यायिक फैसलों की प्रतियां और संबंधित कानूनी विवरण मांगे हैं। उन्होंने कहा कि पूरी जानकारी मिलने के बाद ही सरकार आगे के कूटनीतिक कदमों पर विचार करेगी। बांग्लादेशी अधिकारी यह भी जांच कर रहे हैं कि मृतकों के नाम सऊदी अरब में हिरासत में रखे गए बांग्लादेशी नागरिकों की आधिकारिक सूची में शामिल थे या नहीं। सरकार ने मामले की पूरी जानकारी सामने आने से पहले अटकलों से बचने की बात कही है।
क्या है ताजीर कानून, जिसके तहत दी गई मौत की सजा?
सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के मुताबिक, दोनों बांग्लादेशी नागरिकों को इस्लामी न्याय व्यवस्था के अंतर्गत 'ताजीर' के तहत मौत की सजा सुनाई गई थी। ताजीर ऐसी दंड व्यवस्था है, जिसमें संबंधित अपराध की प्रकृति और परिस्थितियों के आधार पर सजा तय करने के लिए न्यायाधीश को विवेकाधिकार दिया जाता है। सऊदी अधिकारियों का कहना है कि मामले में अपराध की गंभीरता और धार्मिक स्थल की पवित्रता के उल्लंघन को देखते हुए सजा दी गई। मंत्रालय ने अपने बयान में कानून लागू करने और धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने के प्रति प्रतिबद्धता भी दोहराई। हालांकि, उपलब्ध सार्वजनिक विवरण से यह स्पष्ट नहीं होता कि अदालत ने आरोपों के समर्थन में कौन-कौन से साक्ष्य स्वीकार किए थे।
वियना कन्वेंशन के पालन पर भी उठे सवाल
इस मामले में एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी सामने आया है कि क्या सऊदी अरब के अधिकारियों ने राजनयिक सूचना से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन किया था। विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम से जब पूछा गया कि क्या सऊदी अरब ने वियना कन्वेंशन ऑन कॉन्सुलर रिलेशंस के तहत अपनी जिम्मेदारियों का उल्लंघन किया है, तो उन्होंने तत्काल निष्कर्ष देने से इनकार किया।उन्होंने कहा कि सरकार को अभी पूरी जानकारी नहीं मिली है। इसलिए जांच और कानूनी प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज प्राप्त होने के बाद ही इस विषय पर स्थिति स्पष्ट की जा सकेगी। वियना कन्वेंशन के अंतर्गत विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी और वाणिज्य दूतावास से संपर्क से संबंधित प्रावधान हैं। हालांकि, किसी विशेष मामले में इन प्रावधानों के उल्लंघन का निष्कर्ष उपलब्ध तथ्यों और कानूनी परिस्थितियों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
सऊदी अरब में 30 लाख से ज्यादा बांग्लादेशी
बांग्लादेश और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से महत्वपूर्ण आर्थिक और श्रमिक संबंध हैं। सऊदी अरब में 30 लाख से अधिक बांग्लादेशी नागरिक रहते और काम करते हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे प्रवासी श्रमिकों की है, जो विभिन्न निजी कंपनियों और सेवा क्षेत्रों में कार्यरत हैं। विदेशों में काम करने वाले बांग्लादेशी नागरिकों की सुरक्षा और उनके कानूनी अधिकार बांग्लादेश सरकार के लिए महत्वपूर्ण विषय रहे हैं। ऐसे में दो नागरिकों को फांसी दिए जाने और पूर्व सूचना नहीं मिलने का मामला राजनयिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
क्या दोनों देशों के रिश्तों पर पड़ेगा असर?
बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया है कि सऊदी अरब के साथ उनके देश के अच्छे संबंध हैं। उन्होंने कहा कि किसी दूसरे देश में रहने वाले नागरिकों को वहां के कानूनों का पालन करना होता है। साथ ही बांग्लादेश सरकार अपने नागरिकों से जुड़े मामलों में आवश्यक जानकारी प्राप्त करना चाहती है। फिलहाल दोनों देशों के बीच राजनयिक संपर्क जारी है और बांग्लादेश को सऊदी अरब से विस्तृत आधिकारिक जानकारी मिलने का इंतजार है। इसलिए मामले को लेकर सवाल जरूर उठे हैं, लेकिन दोनों देशों के संबंधों में औपचारिक टूट या किसी बड़े कूटनीतिक प्रतिबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
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