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DHULE धुले। महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री और सूखा निवारण मंत्रिमंडलीय उपसमिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने रविवार को धुले जिले के सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा कर खरीफ फसलों की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने धुले तालुका के कासविहिर में खेतों का निरीक्षण किया और किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं। बावनकुले का यह दौरा पावस की कमी से हुए फसल नुकसान और सूखे की स्थिति का आकलन करने के लिए था।
खेतों का निरीक्षण करने के बाद बावनकुले ने कहा कि कपास, अरहर और मक्का समेत खरीफ की फसलों को गंभीर नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि कासविहिर में स्थिति बेहद खराब दिखाई दे रही है। उनके मुताबिक, इस समय तक कपास की फसल कमर से ऊपर तक हो जानी चाहिए थी, लेकिन पौधों का अपेक्षित विकास नहीं हुआ है।
बावनकुले ने स्थिति की गंभीरता बताते हुए कहा, “कपास बर्बाद हो गई है, अरहर बर्बाद हो गई है और मक्का भी बर्बाद हो गया है। कुल मिलाकर पूरी खरीफ फसल को गंभीर नुकसान हुआ है।” उन्होंने दावा किया कि मौजूदा स्थिति में अपेक्षित उत्पादन का 10 प्रतिशत भी मिलना मुश्किल हो सकता है।
धुले जिले में बारिश की कमी का असर पहले भी कपास और मक्का की फसलों पर सामने आया था। हाल में जिले के अन्य प्रभावित खेतों के निरीक्षण में कपास के पौधों का विकास रुकने, कपास की गांठें नहीं खुलने और मक्के की फसल पूरी तरह विकसित नहीं होने जैसी समस्याएं दर्ज की गई थीं।
महाराष्ट्र के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार फसल नुकसान का आकलन करा रही है। बावनकुले ने इससे पहले अधिकारियों को निर्देश दिया था कि प्रभावित किसानों के खेतों में जाकर सही तरीके से पंचनामा किया जाए, क्योंकि इसी आकलन के आधार पर राहत सहायता तय की जाएगी। सूखे के बीच किसानों को कर्ज वसूली से राहत देने के लिए बैंकों और सहकारी संस्थाओं को किसानों पर दबाव नहीं बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार की ओर से पेयजल, पशुओं के चारे और जल संरक्षण से जुड़े उपायों पर भी जोर दिया जा रहा है।
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