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Jaisalmer जैसलमेर। राजस्थान के जैसलमेर जिले में ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत महमूद शाह पीर जिलानी दरगाह को जारी किए गए प्रशासनिक नोटिस को लेकर विवाद गहरा गया है। इस बीच रामगढ़ के पूर्व सरपंच गोविंद भार्गव ने दरगाह के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यह धार्मिक स्थल लगभग 250 से 300 वर्ष पुराना है और स्थानीय लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है।
गोविंद भार्गव के अनुसार, वर्ष 1980 के आसपास जब भारतीय सेना ने इस क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियों और निर्माण कार्यों का विस्तार शुरू किया था, तब प्रारंभिक योजना के तहत इसी स्थान पर सैन्य ढांचा तैयार किया जाना था। हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों ने सेना के अधिकारियों को बताया कि यह क्षेत्र एक प्राचीन दरगाह और कब्रिस्तान है, जहां वर्षों से लोग श्रद्धा व्यक्त करने आते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों से जानकारी मिलने के बाद सेना ने धार्मिक और सामाजिक संवेदनशीलता का सम्मान करते हुए निर्माण कार्य के लिए दूसरी जगह का चयन किया। भार्गव का दावा है कि इससे स्पष्ट होता है कि यह स्थल लंबे समय से अस्तित्व में है और इसकी ऐतिहासिक पहचान रही है।
दरगाह को जारी नोटिस के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मामले में किसी भी प्रकार का फैसला लेने से पहले ऐतिहासिक दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों और स्थानीय परंपराओं का समुचित अध्ययन किया जाना चाहिए। वहीं प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले को लेकर क्षेत्र में लोगों की नजरें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। स्थानीय नागरिकों और संबंधित पक्षों का कहना है कि विवाद का समाधान कानून और तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए, ताकि क्षेत्र में सौहार्द और शांति बनी रहे।
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