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किशोर कुमार की बायोग्राफी को नेशनल अवॉर्ड देने पर विवाद, पटना हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
Shantanu Roy
19 Sept 2026 8:05 PM IST

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New Delhi. नई दिल्ली। किशोर कुमार की बायोग्राफी ‘किशोर कुमार: द अल्टीमेट बायोग्राफी’ को 70वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट सिनेमा बुक चुने जाने पर सवाल उठे हैं। पटना हाईकोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और NFDC से पूछा है कि यह किताब भारतीय सिनेमा की श्रेणी में किस आधार पर आती है। हिंदी लेखक और साहित्यिक आलोचक अनंत प्रसाद सिन्हा ने पुरस्कार रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दायर की है। इस किताब के लेखक अनिरुद्ध भट्टाचार्जी और पार्थिव धर हैं और इसे हार्पर कॉलिन्स ने प्रकाशित किया है।
मंत्रालय, NFDC और लेखकों को नोटिस
जस्टिस अजीत कुमार की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान मंत्रालय, NFDC, जूरी सदस्यों और दोनों लेखकों को नोटिस जारी किया गया। पुरस्कार की घोषणा 16 अगस्त 2024 को हुई थी और 8 अक्टूबर 2024 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में इसे प्रदान किया गया था। सिन्हा का कहना है कि पुरस्कार के लिए तय पात्रता शर्तों का पालन नहीं किया गया। उनके अनुसार, सर्वश्रेष्ठ सिनेमा पुस्तक का सम्मान भारत में किसी भी भाषा में प्रकाशित भारतीय सिनेमा पर आधारित सर्वश्रेष्ठ किताब को दिया जाना चाहिए। केंद्र सरकार के वरिष्ठ पैनल वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा। अदालत ने यह मांग दर्ज कर ली है। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी।
सिन्हा ने अपनी किताब का भी दिया हवाला
याचिका में सिन्हा ने दो प्रमुख आधारों पर पुरस्कार को चुनौती दी है। उनका कहना है कि अवॉर्ड के नियमों के मुताबिक किताब भारतीय सिनेमा पर होनी चाहिए, जबकि किशोर कुमार की बायोग्राफी इस कसौटी पर सवाल खड़े करती है। सिन्हा ने अपनी किताब *‘दो गुलफामों की तीसरी कसम’* का भी जिक्र किया है। उनका दावा है कि उनकी किताब सभी निर्धारित दिशा-निर्देशों को पूरा करती है, इसलिए पुरस्कार उसे मिलना चाहिए था। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किशोर कुमार की बायोग्राफी को भारतीय सिनेमा पर किताब माना जा सकता है, तो बीआर अंबेडकर की बायोग्राफी को भारतीय संविधान पर किताब क्यों नहीं माना जा सकता। सिन्हा के मुताबिक, उन्होंने अदालत जाने से पहले यही बात सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सामने भी रखी थी, लेकिन उनकी शिकायत नहीं मानी गई।
बायोग्राफी में किशोर कुमार की जिंदगी और संगीत
नेशनल फिल्म अवॉर्ड के नियमों के अनुसार, बेस्ट सिनेमा बुक के विजेता को स्वर्ण कमल और 1 लाख रुपए का नकद पुरस्कार दिया जाता है। 70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के लिए 1 जनवरी 2022 से 31 दिसंबर 2022 के बीच प्रकाशित किताबें पात्र थीं। ‘किशोर कुमार: द अल्टीमेट बायोग्राफी’ में किशोर कुमार के जीवन, संगीत और उनके व्यक्तित्व के अलग-अलग पहलुओं को बताया गया है। दूसरी ओर, सिन्हा की किताब ‘दो गुलफामों की तीसरी कसम’ में फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी ‘मारे गए गुलफाम’ से 1966 की फिल्म ‘तीसरी कसम’ बनने तक की छह साल की यात्रा का वर्णन है।
अभिनेता से गायक तक बना लंबा सफर
किशोर कुमार का असली नाम आभास कुमार गांगुली था। उनका जन्म 4 अगस्त 1929 को मध्य प्रदेश के खंडवा में हुआ था। उन्होंने 1946 की फिल्म ‘शिकारी’ से अभिनेता के तौर पर शुरुआत की। 1948 की ‘जिद्दी’ में उन्हें पहली बार गाने का मौका मिला, जहां उन्होंने देव आनंद के लिए आवाज दी।
बड़े भाई अशोक कुमार की मदद से वे बॉम्बे टॉकीज में कोरस सिंगर बने। बाद में एस.डी. बर्मन ने उन्हें अपनी अलग गायकी विकसित करने की सलाह दी। किशोर कुमार ने योडलिंग के जरिए अपनी खास पहचान बनाई। उन्होंने अपने करियर में 1198 फिल्मों के लिए 2678 गाने गाए और राजेश खन्ना के लिए 92 फिल्मों में 245 गाने रिकॉर्ड किए।
फीस को लेकर थे बेहद सख्त
किशोर कुमार अपनी फीस को लेकर काफी सख्त माने जाते थे और ‘नो मनी, नो वर्क’ के सिद्धांत पर काम करते थे। कई किस्सों में उनके इसी अंदाज का जिक्र मिलता है। एक फिल्म में 5 हजार रुपए कम मिलने पर वे शूटिंग के दौरान सेट से भाग गए थे। एक अन्य मामले में आधी फीस मिलने पर उन्होंने आधा सिर और आधी मूंछें मुंडवाकर शूटिंग की। प्रोड्यूसर आर.सी. तलवार से 8 हजार रुपए बकाया मिलने में देरी हुई तो किशोर कुमार उनके घर के बाहर रोज जाकर पैसे मांगते थे।
जिंदगी के आखिरी साल और निधन
किशोर कुमार की निजी जिंदगी भी कई उतार-चढ़ाव से भरी रही। उन्होंने चार शादियां कीं। योगिता बाली से तलाक के बाद उन्होंने मिथुन चक्रवर्ती के लिए गाना छोड़ दिया था। वे अपने अकेलेपन में घर के पेड़ों से बातें करने की बात भी कह चुके थे। 1987 तक उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री छोड़कर खंडवा में बसने का मन बना लिया था। 13 अक्टूबर 1987 को बड़े भाई अशोक कुमार के 76वें जन्मदिन पर 58 साल की उम्र में हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार खंडवा में किया गया।
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