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1320 मेगावाट थर्मल पावर प्रोजेक्ट पर विवाद, ऊर्जा सचिव ने बताए टेंडर प्रक्रिया के तथ्य

SHIDDHANT
17 Sept 2026 8:36 PM IST
1320 मेगावाट थर्मल पावर प्रोजेक्ट पर विवाद, ऊर्जा सचिव ने बताए टेंडर प्रक्रिया के तथ्य
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प्रतिस्पर्धी बोली से होगा अंतिम चयन: ऊर्जा सचिव
Dehradun. देहरादून। उत्तराखंड में प्रस्तावित 1320 मेगावाट थर्मल पावर की बिजली खरीद प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रमुख सचिव ऊर्जा डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने तथ्यात्मक स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों, तकनीकी जरूरतों, प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया और उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) की स्वीकृति के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। डॉ. सुंदरम ने स्पष्ट किया कि बिजली खरीद का उद्देश्य किसी एक कंपनी को लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि राज्य की अगले 25 वर्षों की बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए भरोसेमंद बेस-लोड बिजली की व्यवस्था करना है।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय की ओर से वर्ष 2019 में जारी Model Bidding Document एक सामान्य मॉडल दस्तावेज है। अलग-अलग परियोजनाओं में तकनीकी जरूरत, ईंधन उपलब्धता, स्थान और परिवहन लागत जैसी परिस्थितियां अलग होती हैं। इसी आधार पर बोलीदाताओं से मिले सुझावों और आपत्तियों का तकनीकी परीक्षण किया गया। प्रमुख सचिव ने कहा कि प्रस्तावित बदलावों को उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के सामने रखा गया, जहां विस्तृत चर्चा के बाद आवश्यक संशोधनों को मंजूरी दी गई।
पांच कंपनियां RFQ चरण में हुईं योग्य
डॉ. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि बिजली खरीद का काम किसी एक कंपनी को दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि Request for Quotation (RFQ) चरण में पांच कंपनियां योग्य पाई गई हैं। इसके बाद Request for Proposal (RFP) प्रक्रिया में भी प्रतिस्पर्धा जारी है। उन्होंने कहा कि अंतिम चयन प्रतिस्पर्धी बोली के दौरान मिलने वाले कुल टैरिफ के आधार पर किया जाएगा।
25 वर्षों की बिजली जरूरत को ध्यान में रखकर योजना
ऊर्जा सचिव ने बताया कि 1320 मेगावाट बिजली व्यवस्था का उद्देश्य भविष्य में राज्य के उपभोक्ताओं को लगातार और पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि राज्य की बिजली आवश्यकता का आकलन Central Electricity Authority (CEA) की Resource Adequacy Study के आधार पर किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 25 वर्षों में ₹1.60 से ₹1.66 लाख करोड़ के संभावित भुगतान का मतलब एक साथ भुगतान नहीं है, बल्कि पूरी अवधि में होने वाले अनुमानित खर्च को दर्शाता है।
प्लांट स्थान को लेकर भी दी जानकारी
डॉ. सुंदरम ने कहा कि निविदा में संयंत्र को देश के किसी भी उपयुक्त स्थान पर स्थापित करने का विकल्प रखा गया है। इसका उद्देश्य ईंधन उपलब्धता, परिवहन लागत और अन्य तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कंपनियों को प्रतिस्पर्धी दर देने का अवसर देना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में प्लांट लगाने पर कोई रोक नहीं है। यदि कोई कंपनी राज्य में संयंत्र स्थापित कर प्रतिस्पर्धी दर पर बिजली उपलब्ध कराती है तो वह भी प्रक्रिया में शामिल हो सकती है।
Fixed Charge को लेकर स्थिति साफ
ऊर्जा सचिव ने बताया कि Model Bidding Document में Fixed Charge की सीमा 70 प्रतिशत थी। वास्तविक परिस्थितियों को देखते हुए इसे बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे UERC ने जांच के बाद मंजूरी दी। उन्होंने कहा कि केवल Fixed Charge बढ़ने से उपभोक्ताओं पर स्वतः अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता। बिजली की वास्तविक कीमत Fixed Charge और Fuel Charge को मिलाकर बनने वाले कुल टैरिफ से तय होती है।
पहली यूनिट 42 महीने में उपलब्ध कराने का लक्ष्य
उन्होंने बताया कि परियोजना को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने की योजना है। पहली यूनिट के लिए 42 महीने और दूसरी यूनिट के लिए 48 महीने की समयसीमा तय की गई है। डॉ. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि UJVNL और THDC के संयुक्त उपक्रम के विकल्प पर भी विचार किया गया था, लेकिन परिस्थितियों के कारण प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। उन्होंने दोहराया कि 1320 मेगावाट बिजली खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता, तकनीकी मूल्यांकन, प्रतिस्पर्धा और नियामकीय निगरानी का पूरा पालन किया जा रहा है।
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