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Telangana तेलंगाना। महाराष्ट्र में जबरन धार्मिक परिवर्तन रोकने से जुड़े कानून को लेकर बहस तेज हो गई है। तहरीक मुस्लिम शब्बान के अध्यक्ष मौलाना मुश्ताक मलिक ने इस कानून के कुछ प्रावधानों पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के अलावा बीजेपी शासित कई राज्यों में भी इस तरह के कानून लाए गए हैं, लेकिन महाराष्ट्र के कानून में कुछ ऐसे प्रावधान हैं, जिन पर गंभीर चर्चा की जरूरत है।
मौलाना मुश्ताक मलिक ने कहा कि कानून में बच्चों से जुड़े प्रावधानों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि किसी दंपति से बच्चा जन्म लेता है और बाद में धर्म परिवर्तन को लेकर विवाद सामने आता है तो बच्चे के धर्म और अभिभावक की भूमिका को लेकर विशेष नियम बनाए गए हैं।
बच्चों की कस्टडी और धर्म को लेकर उठाए सवाल
मौलाना मुश्ताक मलिक ने कहा कि कानून में यह प्रावधान चिंता का विषय है कि यदि यह साबित होता है कि धर्म परिवर्तन जबरन कराया गया था, लेकिन उस विवाह से बच्चा पैदा हुआ है, तो बच्चे की कस्टडी मां के पास रहने की बात कही गई है।
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रावधानों पर सभी पक्षों के बीच व्यापक चर्चा होनी चाहिए। उनका कहना था कि कानून बनाते समय परिवार, बच्चों के अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
जबरन धर्म परिवर्तन रोकने के उद्देश्य से कानून
महाराष्ट्र के कानून में जबरन, दबाव, धोखे, प्रलोभन या गलत तरीके से कराए गए धर्म परिवर्तन को रोकने के प्रावधान शामिल हैं। कानून के तहत ऐसे मामलों में जांच और कानूनी कार्रवाई की व्यवस्था की गई है।
सरकार और समर्थकों का कहना है कि कानून का उद्देश्य जबरन धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है, जबकि आलोचक इसके कुछ प्रावधानों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
अन्य राज्यों में भी बने हैं ऐसे कानून
भारत के कई राज्यों में धर्म की स्वतंत्रता से जुड़े कानून लागू हैं, जिन्हें आमतौर पर एंटी-कन्वर्जन कानून कहा जाता है। इन कानूनों का उद्देश्य बल, धोखे या प्रलोभन के जरिए धर्म परिवर्तन को रोकना बताया जाता है।
मौलाना मुश्ताक मलिक ने कहा कि ऐसे मामलों में कानून बनाते समय सभी समुदायों और विशेषज्ञों की राय को शामिल किया जाना चाहिए।
राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज
महाराष्ट्र में धर्मांतरण कानून को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है। जहां एक पक्ष इसे अवैध धर्म परिवर्तन रोकने के लिए जरूरी कदम बता रहा है, वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि कानून के कुछ प्रावधान व्यक्तिगत अधिकारों और सामाजिक संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं।
मामले को लेकर आने वाले समय में और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है। फिलहाल धर्मांतरण कानून को लेकर चर्चा जारी है।
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