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अल्फा-2 में दूषित पानी से स्वास्थ्य संकट, निवासियों ने आंदोलन की चेतावनी दी

Shantanu Roy
13 Aug 2025 5:45 PM IST
अल्फा-2 में दूषित पानी से स्वास्थ्य संकट, निवासियों ने आंदोलन की चेतावनी दी
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Greater Noida. ग्रेटर नोएडा। सेक्टर अल्फा-2 में निवासियों का जीवन दूषित और बदबूदार पानी की सप्लाई के कारण अस्त-व्यस्त हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वच्छ पेयजल की जगह घरों में गंदा पानी पहुंच रहा है, जिससे कई लोग बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हुए हैं। इस गंभीर स्थिति के बावजूद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की चुप्पी ने निवासियों में आक्रोश बढ़ा दिया है। सेक्टर अल्फा-2 आरडब्ल्यूए के पूर्व अध्यक्ष जितेंद्र मावी के अनुसार, पिछले एक सप्ताह से बी, सी, एच और आई ब्लॉक में पीने के पानी के साथ सीवर का पानी मिलकर सप्लाई हो रहा है। मावी ने बताया कि मुख्य सप्लाई लाइन में ही सीवर का पानी घुल जाने से घरों में एकदम काला और बदबूदार पानी पहुंच रहा है। मंगलवार को एच ब्लॉक के कई घरों में पानी की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि लोग नहाने, कपड़े धोने और हाथ धोने तक से परहेज कर रहे थे।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि पाइपलाइन काफी पुरानी और बार-बार क्षतिग्रस्त हो जाती है। प्रेशर बढ़ने पर यह टूटती है और क्षतिग्रस्त हिस्सों से सीवर का पानी सीधे पीने के पानी में मिल जाता है। इसके कारण बच्चों और बुजुर्गों में पेट संबंधी बीमारियां फैल रही हैं। कई मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। निवासियों ने बताया कि इस समस्या की शिकायत ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ, एसीईओ और ओएसडी तक की गई है। हालांकि, अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बार-बार शिकायतों के बावजूद न तो पाइपलाइन की मरम्मत की गई और न ही पानी की सप्लाई के स्रोत को साफ किया गया। जितेंद्र मावी ने कहा कि इस समस्या के कारण लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। घरों में पानी का इस्तेमाल नहाने, खाना बनाने और पीने के लिए असुरक्षित हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि पीने के पानी में सीवर का मिश्रण केवल असुविधा नहीं, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य खतरा है।
स्थानीय लोग मानते हैं कि अगर समस्या का समाधान न किया गया तो यह एक बड़े स्वास्थ्य संकट में बदल सकता है। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को इसका सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। पेट संबंधी रोग, उल्टी और दस्त जैसी बीमारियां इस दूषित पानी के कारण फैल रही हैं। एक निवासी ने बताया कि पानी की पाइपलाइन पुरानी होने के कारण छोटे-छोटे रिसाव लगातार होते रहते हैं। प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर मरम्मत के वादे किए जाते हैं, लेकिन वास्तविक सुधार नहीं किया गया। इसके चलते घरों में काला, गंदा और दुर्गंधयुक्त पानी सप्लाई हो रहा है। स्थानीय लोग प्राधिकरण से मांग कर रहे हैं कि तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। पाइपलाइन की मरम्मत, सप्लाई के स्रोत की सफाई और पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
आरडब्ल्यूए के पूर्व अध्यक्ष जितेंद्र मावी ने कहा कि यह मुद्दा केवल सेक्टर अल्फा-2 का नहीं है, बल्कि पूरे ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के लिए गंभीर चेतावनी है। उन्होंने अपील की कि प्राधिकरण स्वास्थ्य और सुरक्षा की दृष्टि से तुरंत कदम उठाए और लोगों के लिए साफ पानी सुनिश्चित करे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या पिछले कई महीनों से चल रही है। बार-बार शिकायतों के बावजूद प्राधिकरण ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर इस संकट का असर गंभीर रूप से पड़ रहा है। निवासियों ने यह भी कहा कि पानी की आपूर्ति की गुणवत्ता की जांच और रिसाव वाले पाइपों की समय पर मरम्मत आवश्यक है। प्राधिकरण को नियमित निरीक्षण के साथ ही पानी की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक
उपकरण
और तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए। स्थानीय आरडब्ल्यूए ने प्राधिकरण से अपील की है कि तुरंत समस्या का समाधान करें और लोगों को राहत दें। उन्होंने कहा कि अगर प्राधिकरण ने ध्यान नहीं दिया तो वे बड़े स्तर पर जन आंदोलनों के लिए मजबूर होंगे। इस गंभीर स्थिति ने यह साबित कर दिया है कि ग्रेटर नोएडा में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति और जल सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। स्थानीय प्रशासन और प्राधिकरण की चुप्पी से लोगों में निराशा और आक्रोश दोनों बढ़ रहे हैं।
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