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संस्कृत और तकनीक का मेल खोलेगा नई संभावनाएं: निर्मला सीतारमण

SHIDDHANT
15 Sept 2026 9:56 PM IST
संस्कृत और तकनीक का मेल खोलेगा नई संभावनाएं: निर्मला सीतारमण
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Chennai चेन्नई। केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने संस्कृत, ज्ञान और आधुनिक तकनीक के बीच बढ़ते संबंधों पर जोर देते हुए कहा कि आज ज्ञान तकनीक के साथ बेहद गहराई से जुड़ चुका है। ऐसे में भविष्य की योजना बनाते समय संस्थानों के लिए तकनीक को नजरअंदाज करना संभव नहीं है। संस्कृत के पास तकनीक के अनुरूप खुद को ढालने की अंतर्निहित क्षमता है, जिसका लाभ शिक्षा और ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में उठाया जा सकता है। चेन्नई में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि किसी भी संस्थान को अपनी निरंतरता बनाए रखते हुए भविष्य की जरूरतों के अनुसार योजना बनानी होगी। यह विषय केवल संस्कृत तक सीमित नहीं है, बल्कि ज्ञान के बदलते स्वरूप से भी जुड़ा हुआ है। वर्तमान समय में ज्ञान और टेक्नोलॉजी एक-दूसरे के साथ इस तरह जुड़ रहे हैं कि तकनीक के बिना आगे बढ़ना कठिन है।
वित्त मंत्री ने संस्कृत की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक के साथ तालमेल स्थापित करने के मामले में संस्कृत को एक अंतर्निहित लाभ प्राप्त है। उनके मुताबिक इसी विशेषता के कारण संस्कृत से जुड़े संस्थान बेहतर स्थिति में हैं और इसके माध्यम से अन्य क्षेत्रों में भी कई नई संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। उन्होंने अपने संबोधन में सीखने की प्रक्रिया और मॉडल निर्माण जैसे क्षेत्रों का भी जिक्र किया। सीतारमण ने संकेत दिया कि किसी विषय को बेहतर और सटीक तरीके से सीखने या कोई मॉडल तैयार करने जैसे कार्यों में तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। संस्कृत और तकनीक का संयोजन इस दिशा में नए प्रयोगों और संभावनाओं का रास्ता खोल सकता है।
उनकी टिप्पणी ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब शिक्षा और शोध में डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भाषा आधारित तकनीकी मॉडल का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। भारतीय भाषाओं और पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी सामग्री को डिजिटल स्वरूप देने की दिशा में भी लगातार काम हो रहा है।
सीतारमण ने इस बात पर जोर दिया कि संस्थानों को केवल अपनी परंपरा और विरासत को आगे बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि भविष्य की जरूरतों को समझते हुए तकनीक का इस्तेमाल भी करना चाहिए। इससे संस्कृत के अध्ययन और ज्ञान परंपरा को आधुनिक माध्यमों से नई पीढ़ी तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। वित्त मंत्री के मुताबिक ज्ञान और तकनीक का बढ़ता मेल भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। संस्कृत की संरचना और उसकी अनुकूलन क्षमता का सही इस्तेमाल किया जाए तो शिक्षा, अध्ययन और तकनीकी मॉडल तैयार करने जैसे क्षेत्रों में इसका व्यापक उपयोग संभव हो सकता है।
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