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कलेक्टर ने अपनाया सख्त रुख, इन अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई, मची खलबली
jantaserishta.com
7 March 2025 12:33 PM IST

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फाइल फोटो
जानें पूरा मामला.
खरगोन: भ्रष्टाचार के मामले में दोषी सरकारी बाबू को चपरासी बनाने वाली कलेक्टर भव्या मित्तल के एक बार फिर सख्त तेवर देखने को मिले हैं. इस महिला IAS अफसर ने अब स्कॉलरशिप स्कैम के आरोपी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है.
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में यह सनसनीखेज घोटाला सामने आया है. सहायक संचालक (AD), डीडीओ क्रिएटर और लेखा प्रभारी ने मिलकर 84 लाख 39 हजार 977 रुपये की हेराफेरी की. यह राशि छात्रों की उच्च शिक्षा के लिए दी जाने वाली छात्रवृत्ति की थी, जिसे डिजिटल सिग्नेचर और खातों में हेरफेर कर गबन किया गया. कलेक्टर भव्या मित्तल ने तीनों अधिकारियों के खिलाफ थाना कोतवाली में FIR दर्ज कराई और वसूली के आदेश दिए हैं.
खरगोन के किला मैदान स्थित पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सहायक संचालक इतिशा जैन, डीडीओ क्रिएटर आशीष दुबे और लेखा प्रभारी शेखर रावत पर 2021-22 और 2022-23 में फर्जी भुगतान का आरोप है. जिला कोषालय अधिकारी आनंद पटले, अपर कलेक्टर जेएस बघेल और सहायक आयुक्त प्रशांत आर्य की जांच समिति ने दस्तावेजों से पुष्टि की कि 84 लाख से अधिक की राशि का गबन हुआ. कई छात्रों के खातों में हेरफेर कर यह राशि निकाली गई.
कलेक्टर ने बताया, "OBC विभाग में क्रिएटर और अप्रूवर के डिजिटल सिग्नेचर से राशि का आहरण हुआ. प्राथमिक तौर पर तीन लोग जिम्मेदार हैं, आगे जांच में अन्य शामिल पाए गए तो उन्हें भी आरोपी बनाया जाएगा."
लेखा प्रभारी शेखर रावत ने लिखित बयान और वॉट्सएप वीडियो में कबूला कि कर्जदाताओं के दबाव में उसने यह गड़बड़ी की. उसने छात्रों के खातों में हेरफेर कर राशि निकाली और कर्ज चुकाया. सहायक संचालक इतिशा जैन ने खुद कलेक्टर को शिकायत की थी, लेकिन जांच में उनकी मॉनिटरिंग में कमी पाई गई. डीडीओ क्रिएटर आशीष दुबे ने भी अपने दायित्वों का पालन नहीं किया. विभाग का चार्ज अस्थाई रूप से हस्तांतरित कर दिया गया है.
कलेक्टर भव्या मित्तल ने कहा, "दो अधिकारियों के खिलाफ पहले से विभागीय जांच (DE) चल रही थी. अब सहायक संचालक के खिलाफ भी कार्रवाई के लिए लिखा गया है. इतने बड़े स्तर की गड़बड़ी में वरिष्ठ अधिकारी जिम्मेदार हैं."
थाना कोतवाली में आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त प्रशांत आर्य और सहायक ग्रेड-3 विनय शर्मा ने शिकायत दर्ज की. जांच में पता चला कि यह मामला पहले से चल रहा था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी खुद को बचाने में जुटे थे. अब ट्रेजरी अधिकारी और सहायक आयुक्त के जरिए FIR दर्ज की गई है.
यह घोटाला उन छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ है, जो पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग से हैं. विभाग का उद्देश्य इनके उत्थान के लिए छात्रवृत्ति देना था, लेकिन अधिकारियों ने इसे अपनी जेब में डाल लिया. कलेक्टर ने वसूली के साथ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है.
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