
x
कोकरोच’ दिपके की चेतावनी
महाराष्ट्र: CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर एक बार फिर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित नहीं होते, तब तक ऐसे चुनावों में हिस्सा लेने का कोई मतलब नहीं है। दिपके ने आरोप लगाया कि मौजूदा चुनावी व्यवस्था में पहले से ही यह तय दिखाई देता है कि कौन जीतने वाला है। हालांकि, ये दावे उनके राजनीतिक आरोप हैं और स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं हैं।
दिपके ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी उन राज्यों में भी जीत दर्ज कर रही है, जहां उनके मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता की चरम लहर के दौरान भी पार्टी ऐसा प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। उन्होंने इन चुनावी नतीजों का श्रेय मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को देने का दावा किया। इससे पहले भी दिपके ने हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों में बीजेपी के प्रदर्शन को लेकर इसी तरह के आरोप लगाए थे।
उन्होंने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार पद से हटते हैं और SIR (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया रोक दी जाती है, तब यह पता चल सकेगा कि बीजेपी वास्तव में कितनी सीटें जीत सकती है। SIR को लेकर चुनावी मतदाता सूचियों में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया पर राजनीतिक विवाद जारी है। चुनाव आयोग ने हालांकि SIR को लेकर उठाए गए सवालों और कथित आंतरिक मतभेदों की अलग व्याख्या की है।
‘जितने केस करना है करिए, हम लड़ेंगे’
पुणे में अपने संबोधन के दौरान दिपके ने सरकार और प्रशासन को चुनौती देते हुए कहा कि उनके खिलाफ जितने मामले दर्ज करने हों, किए जाएं, लेकिन उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि वे सभी मामलों का सामना करेंगे और देश में लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई जारी रखेंगे।
दिपके की अगुवाई में CJP पहले भी चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर चुका है। 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में संगठन ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। इसके बाद CJP ने देश के अन्य शहरों में भी आंदोलन जारी रखने की घोषणा की। दिपके ने इससे पहले ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम भी दिया था और कहा था कि मांग पूरी नहीं होने पर देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
CJP की ओर से लगाए जा रहे आरोपों का केंद्र SIR, मतदाता सूची और चुनावी पारदर्शिता है। वहीं, इन आरोपों को लेकर चुनाव आयोग और अन्य पक्षों के रुख को अलग-अलग रिपोर्टों में दर्ज किया गया है। ऐसे में दिपके के बयानों को उनके राजनीतिक संगठन के आरोप और मांगों के रूप में देखना जरूरी है, न कि स्थापित निष्कर्ष के रूप में।
Next Story





