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Delhi दिल्ली। अगले महीने चुनाव वाले राज्यों में असम ऐसा राज्य है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है। दोनों ही पार्टियां अपने-अपने गठबंधनों की प्रमुख घटक हैं। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, जो नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (नेडा) के संयोजक भी हैं, भाजपा के एक प्रभावशाली और लोकप्रिय चेहरे के रूप में उभरे हैं। कांग्रेस छोड़ने के बाद उनका राजनीतिक उभार काफी तेज रहा है और पूर्वोत्तर की राजनीति में उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है।
लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने की कोशिश से पहले एंटी-इनकंबेंसी की आशंका के बावजूद सरमा और मजबूत होकर उभरे हैं। उन्हें क्षेत्र का माहिर रणनीतिकार और चतुर नेता माना जा रहा है। इस महीने की शुरुआत में उनकी ‘आशीर्वाद यात्रा’ को जबरदस्त जनसमर्थन मिला। बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी योजनाओं में उनकी सरकार के काम ने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ाया है। बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों और जमीन पर कब्जे के मुद्दे को लेकर उनका सख्त रुख स्थानीय लोगों के बीच खासा प्रभावी साबित हुआ है।
इसी के चलते भाजपा मजबूत जमीनी संगठन और 2023 के परिसीमन के बाद बेहतर स्थिति में नजर आ रही है। परिसीमन के दौरान मुस्लिम बहुल सीटों की संख्या 35 से घटकर 24 हो गई, जिससे कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) की पारंपरिक ताकत कमजोर पड़ने का अनुमान है। वहीं अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित सीटों की संख्या बढ़ने से भाजपा को अपने जनाधार के विस्तार में मदद मिली है।
विपक्ष बिखरा हुआ नजर आ रहा है। छह दलों के गठबंधन के बावजूद कांग्रेस संगठनात्मक कमजोरियों और नेतृत्व संकट से जूझ रही है, जिसके चलते पार्टी में लगातार टूट हो रही है। मैदान में भाजपा का दबदबा खासतौर पर ऊपरी असम में दिखता है। डिब्रूगढ़ में 2014 से लगातार तीन बार लोकसभा सीट भाजपा के पास रही है, जबकि 2021 के विधानसभा चुनाव में भी यहां लगभग सभी सीटों पर जीत मिली।
हालांकि जोरहाट में 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने भाजपा उम्मीदवार को करीब 1.4 लाख वोटों से हराया था। इस बार भाजपा इन सीटों पर पूरी ताकत झोंक रही है।
तिनसुकिया जिले में भी भाजपा गठबंधन ने पिछले चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया है, खासकर चाय बागान और असमिया बहुल क्षेत्रों में।
पहाड़ी जिलों और स्वायत्त परिषद क्षेत्रों में भी जनजातीय वोट सरमा के पक्ष में एकजुट नजर आते हैं, जिससे एनडीए की स्थिति मजबूत बनी हुई है।
मध्य असम और बराक वैली में मुकाबला कड़ा रहने की संभावना है। हालांकि कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच अल्पसंख्यक वोटों के बंटवारे से विपक्ष को नुकसान हो सकता है।
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