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कलाकार और मंत्री के विवाद पर सबकी नजर
देहरादून। उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और मशहूर पंजाबी गायक दलेर मेहंदी के बीच कुंजापुरी मेले में शुरू हुआ विवाद लगातार चर्चा में है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दलेर मेहंदी और उनके भाई से बातचीत कर मामले को शांत कराने की पहल की है। इसके बावजूद मंत्री सुबोध उनियाल अपने पुराने बयान पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि अब वे इस विवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहते।
कुंजापुरी मेले में कैसे शुरू हुआ विवाद?
दरअसल, टिहरी जिले के प्रसिद्ध कुंजापुरी देवी मेले में सोमवार को सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में पंजाबी गायक दलेर मेहंदी अपनी प्रस्तुति दे रहे थे। इसी दौरान मंच पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और दलेर मेहंदी के बीच किसी बात को लेकर तनातनी हो गई। कार्यक्रम के बाद मंत्री सुबोध उनियाल ने गायक की प्रस्तुति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दलेर मेहंदी मंच पर लिप-सिंक कर रहे थे। इसके अलावा उन्होंने गायक पर नशे में होने का भी आरोप लगाया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री धामी ने की सुलह की पहल
विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले में हस्तक्षेप किया। उन्होंने दलेर मेहंदी और उनके भाई से बातचीत कर विवाद को शांत कराने की कोशिश की। मुख्यमंत्री की इस पहल को दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, मुख्यमंत्री की बातचीत के बावजूद मंत्री सुबोध उनियाल ने अपने पहले दिए गए बयान से पीछे हटने के संकेत नहीं दिए।
36 लाख रुपये के ऑफर पर क्या बोले मंत्री?
मीडिया से बातचीत के दौरान सुबोध उनियाल ने दलेर मेहंदी के कार्यक्रम को लेकर सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यदि दलेर मेहंदी इतने बड़े कलाकार नहीं होते, तो क्या उन्हें 36 लाख रुपये का ऑफर दिया जाता? मंत्री के इस बयान के बाद कलाकार की प्रस्तुति और कार्यक्रम में दी जाने वाली राशि को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। पत्रकारों ने जब उनसे विवाद को लेकर लगातार सवाल पूछे, तो उन्होंने कहा कि अब वे इस मामले को और आगे नहीं बढ़ाना चाहते। इसके बाद वे बातचीत समाप्त कर वहां से चले गए।
कलाकार और मंत्री के विवाद पर सबकी नजर
कुंजापुरी मेले में हुआ यह घटनाक्रम अब सांस्कृतिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ मुख्यमंत्री ने बातचीत के जरिए मामला शांत कराने की कोशिश की है, वहीं दूसरी ओर मंत्री अपने आरोपों पर कायम दिखाई दे रहे हैं। फिलहाल, दलेर मेहंदी पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और दोनों पक्षों की ओर से किसी औपचारिक समझौते की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में विवाद पूरी तरह समाप्त हुआ है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।
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