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कॉकरोच जनता पार्टी CJP का बड़ा ऐलान, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे का अल्टीमेटम
jantaserishta.com
24 Sept 2026 3:42 PM IST

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CJP ने CEC को दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम
केंद्र सरकार आर-पार के मूड में, दबाव में नहीं झुकेगी
नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर बड़ा बयान दिया है। संगठन की ओर से गुरुवार को कहा गया कि ज्ञानेश कुमार 48 घंटे के भीतर अपने पद से इस्तीफा दें। CJP ने यह भी कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो जंतर-मंतर पर दोबारा प्रदर्शन किया जा सकता है।
यह मामला चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर उठे विवाद के बीच सामने आया है। SIR के दौरान मतदाता सूची में नामों की जांच और संशोधन किया जा रहा है। इसी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों और दूसरे संगठनों की तरफ से अलग-अलग सवाल उठाए जा रहे हैं।
SIR को लेकर पूरा विवाद ?
विवाद की शुरुआत उस रिपोर्ट के बाद और तेज हुई, जिसमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज किए जाने की बात सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने, वोटर डेटा तक पहुंच और कुछ तकनीकी बदलाव जैसे मुद्दे शामिल थे।
इसी रिपोर्ट के अनुसार SIR के तहत 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए। हालांकि, नाम हटाए जाने का मतलब हर मामले में स्थायी रूप से मतदान का अधिकार खत्म होना नहीं है, क्योंकि संबंधित प्रक्रिया में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के प्रावधान भी मौजूद हैं।
CJP ने लगाए गंभीर आरोप
CJP की ओर से SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। संगठन का कहना है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने से लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
CJP ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में बदलाव का असर विपक्षी नेताओं और क्षेत्रीय राजनीतिक ताकतों पर पड़ा है। संगठन ने कई नेताओं के चुनावी क्षेत्रों में वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने का दावा भी किया है। हालांकि, इन दावों को स्वतंत्र रूप से साबित करने वाली जानकारी सामने नहीं आई है, इसलिए इन्हें संगठन के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
चुनाव आयोग ने क्या जवाब दिया?
दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने मीडिया में सामने आई रिपोर्ट पर अपना पक्ष रखा है। आयोग के मुताबिक, तीन सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय, सुझाव और टिप्पणियां आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने कहा कि SIR समेत पिछले एक साल में लिए गए अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं।
रिपोर्ट में जिन मुद्दों पर आपत्तियों का जिक्र है, उनमें फॉर्म-6 में बदलाव, चुनावी डेटा के केंद्रीकरण से जुड़ी चिंताएं, पश्चिम बंगाल में मतदाता नामों से संबंधित अपील और गोवा में मतदाता सूची से जुड़े तकनीकी मामले शामिल हैं।
अब आगे क्या होगा?
CJP के 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद यह विवाद और चर्चा में आ गया है। संगठन ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की बात कही है, जबकि चुनाव आयोग अपने फैसलों को प्रक्रिया के तहत सर्वसम्मति से लिया गया बता रहा है।
फिलहाल विवाद के दो अलग पक्ष सामने हैं। एक तरफ CJP और कुछ राजनीतिक समूह SIR तथा मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि प्रक्रिया में आंतरिक विचार-विमर्श के बाद अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं। ऐसे में आगे की कार्रवाई और आधिकारिक रिकॉर्ड इस विवाद की तस्वीर को और स्पष्ट कर सकते हैं।
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