CJI ने ममता की पार्टी को लगाई फटकार, बिना सबूत के याचिका पर हुए नाराज

लाखों नए वोटरों का जुड़ना: गुरुस्वामी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग (EC) ने 'फॉर्म 6' के माध्यम से 5 से 6 लाख नए मतदाताओं को पंजीकृत किया है। उन्होंने याद दिलाया कि अदालत पहले इस तरह की प्रक्रिया पर सवाल उठा चुकी है। बता दें कि फॉर्म 6 का इस्तेमाल 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नागरिकों द्वारा मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है।
मतदाताओं के नाम कटना: टीएमसी ने मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण (SIR) और 'तार्किक विसंगति' के आधार पर बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटे जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई। पार्टी का दावा है कि नाम काटने का यह अजीबोगरीब आधार केवल बंगाल में ही देखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की इस मौखिक अपील को सुनने से साफ इनकार कर दिया। बेंच ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अदालत बिना किसी ठोस दस्तावेज के केवल मौखिक अनुरोध पर विचार नहीं कर सकती। यदि पार्टी को नए मतदाताओं के नामांकन से कोई शिकायत है, तो उसे कार्रवाई के कारण और शिकायत के आधार को स्पष्ट करते हुए एक नई और औपचारिक याचिका दायर करनी चाहिए।
अदालत की इस टिप्पणी पर वकील मेनका गुरुस्वामी ने स्वीकार किया कि उनके पास फिलहाल अदालत में पेश करने के लिए कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है। उन्होंने बताया कि उनका यह दावा उन मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, जिनमें 5-6 लाख नए वोटरों के सूची में शामिल होने की बात कही गई है।





