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NALSAR में CJI आमंत्रण विवाद, 441 पूर्व छात्रों ने BCI की कार्रवाई को बताया मनमाना

SHIDDHANT
15 Aug 2026 12:14 AM IST
NALSAR में CJI आमंत्रण विवाद, 441 पूर्व छात्रों ने BCI की कार्रवाई को बताया मनमाना
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Delhi दिल्ली। नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) के 441 पूर्व छात्रों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की ओर से छात्रों और शिक्षकों के खिलाफ जांच शुरू करने के प्रयास की आलोचना की है। पूर्व छात्रों ने एक खुले पत्र के जरिए कहा कि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को आमंत्रित करने के मुद्दे पर छात्रों और फैकल्टी की राय को लेकर BCI का रुख अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विश्वविद्यालय की स्वायत्तता के खिलाफ है। पूर्व छात्रों ने BCI द्वारा जारी किए गए और बाद में वापस लिए गए पत्रों को मनमाना और दबाव बनाने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय में छात्रों और शिक्षकों को अपने विचार रखने का अधिकार है और केवल किसी राय या असहमति के आधार पर जांच शुरू करना उचित नहीं है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर जोर
NALSAR के पूर्व छात्रों ने अपने पत्र में कहा कि लोकतांत्रिक संस्थानों में विचारों की विविधता और शांतिपूर्ण असहमति महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि छात्रों और शिक्षकों की आवाज को दबाने की कोशिश शिक्षा संस्थानों के मूल उद्देश्यों को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने विश्वविद्यालयों में स्वतंत्र विचार, बहस और संवाद की संस्कृति को बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। पूर्व छात्रों का कहना है कि कानून के छात्रों को संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप स्वतंत्र रूप से विचार रखने का अधिकार मिलना चाहिए।
BCI के पत्रों पर उठाए सवाल
पूर्व छात्रों ने आरोप लगाया कि BCI की ओर से जारी पत्रों में छात्रों और फैकल्टी से जवाब मांगना एक तरह का दबाव बनाने वाला कदम था। हालांकि बाद में इन पत्रों को वापस ले लिया गया, लेकिन पूर्व छात्रों ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई भविष्य में छात्रों और शिक्षकों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को बनाए रखना जरूरी है और बाहरी संस्थाओं को अकादमिक मामलों में हस्तक्षेप करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
छात्र हित और संस्थागत स्वतंत्रता की मांग
खुले पत्र में NALSAR के पूर्व छात्रों ने छात्र कल्याण और संस्थागत स्वतंत्रता को प्राथमिकता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में स्वस्थ बहस और विचार-विमर्श लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में ऐसे मामलों को संवाद और समझ के जरिए सुलझाया जाएगा, न कि जांच या कार्रवाई के माध्यम से।
NALSAR विवाद अब विश्वविद्यालयों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रशासनिक अधिकारों और अकादमिक स्वायत्तता को लेकर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।
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