सिटी मजिस्ट्रेट सस्पेंड किए गए, ध्वजारोहण के बाद दे दिया था इस्तीफा

बरेली। जिले के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री की तरफ से दोपहर में जिस तरीके से इस्तीफा प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। दोपहर तक इस बात की जानकारी किसी को नहीं थी, कलेक्ट्रेट में झंडा फहराने के बाद जब दोपहर में घर पहुंचे तो तब उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके सनसनी मचा दी। अब सिटी मजिस्ट्रेट को सस्पेंड कर दिए गए है।
अलंकार अग्निहोत्री ने प्रयागराज में संतो से मारपीट और यूजीसी के काले कानून के खिलाफ यह निर्णय लिया। इनको मनाने का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। इनके वरिष्ठ अधिकारी व साथी इनको लेकर जिलाधिकारी अविनाश सिंह के आवास पर मुलाकात कराने पहुंचे। सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री करीब 7:30 बजे आवास से निकलकर कलेक्ट्रेट ध्वजारोहण के लिए पहुंचे। वहां जिलाधिकारी अविनाश सिंह व अन्य अधिकारियों के गणतंत्र दिवस पर आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान किसी को इस बात की जानकारी नहीं हुई कि वह अगले कुछ घंटो में इस्तीफा दे देंगे। फिर वहां से वह अपने कार्यालय में पहुंचे, जहां उन्होंने कार्यालय में बोर्ड पर अपने नाम आगे रिजाइन लिखा, उसके बाद करीब डेढ़ बजे घर पहुंचे।
उन्होंने संतों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान, यूजीसी का काला कानून वापस लो, बीजेपी व ब्राह्मण एमपी, एमएलए बायकॉट स्लोगन लिखा बैनर लेकर घर बाहर फोटो खिंचवाया। इसके बाद इन सभी पोस्ट के साथ अपने इस्तीफे की पोस्ट सोशल मीडिया पर की। जिसके बाद बरेली से लेकर लखनऊ तक अधिकारियों से लेकर सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई। उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल, चीफ इलेक्शन कमिश्नर को भेजा है।
इसके बाद से ही उनके घर पर ब्राह्मण संगठनों के नेता पहुंच गए। उन लोगों ने खुलकर इनके पक्ष में बोला। अग्निहोत्री यह 2019 बैच के पीसीएस अफसर हैं। इन्होंने बीएचयू आईआईटी से बीटेक किया है। पत्रकारों से बातचीत में इन्होंने कहा कि प्रदेश में ब्राह्मण जनप्रतिनि जनता की आवाज नहीं उठाते बल्कि कंपनी के सीईओ की तरह उनके आका जैसा कह रहे हैं वैसा कर रहे हैं। इनको जनता की समस्याओं से कोई मतलब नहीं है। उनका राजनीति में जाने का कोई निर्णय नहीं है। उनका आगे का प्लान जैसा सेट होगा वैसे इन मुद्दों पर आगे काम किया जाएगा।





