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सिटी मजिस्ट्रेट ने अपने पद से इस्तीफा देकर चौंकाया

jantaserishta.com
26 Jan 2026 3:43 PM IST
सिटी मजिस्ट्रेट ने अपने पद से इस्तीफा देकर चौंकाया
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बड़ी खबर.
बरेली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर जनरल कैटेगरी के छात्रों में असंतोष और प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े घटनाक्रम को जोड़ते हुए बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे के पीछे दो प्रमुख कारण बताए हैं. पहला, UGC के हालिया नियम, जिन्हें वह जनरल कैटेगरी या स्वर्ण समाज के छात्रों के अधिकारों के खिलाफ मानते हैं. दूसरा, प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ कथित तौर पर हुई बदसलूकी, जिसमें उनकी चोटी खींचे जाने का आरोप लगाया गया है. अग्निहोत्री का कहना है कि ये दोनों घटनाएं केवल प्रशासनिक या शैक्षणिक निर्णय नहीं हैं, बल्कि समाज के एक बड़े वर्ग की गरिमा और अधिकारों से जुड़ी हुई हैं.
क्या है UGC का नया नियम:
UGC द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए नियमों के तहत देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में Equal Opportunity Centre, Equity Committee, 24x7 हेल्पलाइन और Equity Squads का गठन अनिवार्य किया गया है. UGC का दावा है कि इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के खिलाफ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोकना और उस पर प्रभावी निगरानी रखना है. आयोग के मुताबिक यदि कोई संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है या फंडिंग रोकी जा सकती है. UGC के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 से 2025 के बीच भेदभाव से जुड़ी शिकायतों में 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है. रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों के बाद सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों को भी इन नियमों के पीछे एक अहम वजह बताया जा रहा है. आयोग का मानना है कि बिना ठोस निगरानी व्यवस्था के कैंपस में समानता और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित नहीं किया जा सकता.
हालांकि, जनरल कैटेगरी के छात्रों और उनसे जुड़े संगठनों का नजरिया इससे बिल्कुल अलग है. उनका कहना है कि ये नियम एकतरफा हैं और सभी वर्गों के हितों को समान रूप से नहीं देखते. छात्रों का आरोप है कि ड्राफ्ट नियमों में 'झूठी शिकायत' पर कार्रवाई का जो प्रावधान था, उसे अंतिम नियमों से हटा दिया गया. इससे यह आशंका बढ़ गई है कि किसी भी छात्र या शिक्षक पर बिना ठोस सबूत के भेदभाव का आरोप लगाया जा सकता है, जिसका सीधा असर उसके शैक्षणिक भविष्य और करियर पर पड़ सकता है. विरोध कर रहे छात्रों का यह भी कहना है कि Equity Committees में जनरल कैटेगरी के प्रतिनिधित्व को अनिवार्य नहीं किया गया है.
छात्रों के साथ भेदभाव का डर
इससे यह संदेश जाता है कि भेदभाव केवल आरक्षित वर्ग के छात्रों के साथ ही होता है, जबकि वास्तविकता कहीं अधिक जटिल है. छात्रों का तर्क है कि कैंपस में किसी भी तरह का अन्याय या भेदभाव सभी वर्गों के साथ हो सकता है, इसलिए निगरानी तंत्र में सभी का प्रतिनिधित्व जरूरी है. इसके अलावा Equity Squads को दिए गए व्यापक अधिकारों और 'भेदभाव' की स्पष्ट परिभाषा न होने को लेकर भी चिंता जताई जा रही है. छात्रों को डर है कि इससे कैंपस में निगरानी का दायरा बढ़ेगा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है. उनका कहना है कि किसी सामान्य बहस या असहमति को भी भेदभाव का रंग देकर कार्रवाई की जा सकती है, जिससे शैक्षणिक माहौल दबावपूर्ण हो जाएगा.
इन सभी मुद्दों के बीच बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा सामने आया है. प्रशासनिक सेवा में रहते हुए किसी अधिकारी का इस तरह सार्वजनिक तौर पर सामाजिक और वैचारिक असहमति के आधार पर इस्तीफा देना असामान्य माना जा रहा है. अग्निहोत्री का कहना है कि वह ऐसे नियमों और घटनाओं के बीच खुद को असहज महसूस कर रहे थे, जो समाज में विभाजन को बढ़ावा दे रही हैं.
शंकराचार्य का मुद्दा भी गरमाया
दूसरी ओर प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच जारी विवाद ने भी सियासी रंग पकड़ लिया है. माघ मेला क्षेत्र में उनके शिविर को लेकर प्रशासन और संत समाज के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है. प्रशासन की ओर से उन्हें नोटिस भेजा गया है और उनके शंकराचार्य पद को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं. इस पर विपक्षी दल यूपी सरकार पर लगातार हमलावर हैं. डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से विवाद खत्म करने की अपील करते हुए कहा है कि सरकार संत समाज का सम्मान करती है और किसी भी तरह के टकराव से बचना चाहती है. वहीं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि पुलिस और प्रशासन ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया है. उन्होंने साफ कहा है कि जब तक माफी नहीं मांगी जाएगी, वह संगम स्नान नहीं करेंगे और न ही अपने शिविर में लौटेंगे. इस बीच 24 जनवरी की शाम माघ मेला क्षेत्र के सेक्टर-4 में स्थित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिविर पर कथित तौर पर हमला करने की कोशिश की गई. असामाजिक तत्वों द्वारा शिविर के पास आक्रामक नारेबाजी किए जाने का आरोप लगाया गया है. इस घटना के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से प्रशासन को लिखित शिकायत दी गई है.
शिकायत में अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने और शिविर के आसपास स्थायी पुलिस बल तैनात करने की मांग की गई है. साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि भविष्य में कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी मेला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की होगी. इस घटना ने संत समाज को भी दो धड़ों में बांट दिया है, जहां कुछ संत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में हैं, तो कुछ प्रशासन के रुख को सही ठहरा रहे हैं.
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