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करोड़ों की LSD तस्करी में STF जवानों की भूमिका पर CID ने की सख्त कार्रवाई

Shantanu Roy
19 March 2026 5:55 PM IST
करोड़ों की LSD तस्करी में STF जवानों की भूमिका पर CID ने की सख्त कार्रवाई
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Shimla. शिमला। हिमाचल प्रदेश में 1 करोड़ रुपये मूल्य की एलएसडी (LSD) ड्रग तस्करी का मामला अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। शिमला पुलिस की चल रही जांच में यह खुलासा हुआ है कि प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के कुछ जवानों की भूमिका संदिग्ध लग सकती है। इस खुलासे के बाद सीआईडी (CID) विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एसटीएफ के चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।
सस्पेंड किए गए कर्मचारियों में दो हेड कांस्टेबल और दो कांस्टेबल शामिल हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जांच में यह तथ्य सामने आया कि इस मामले के मुख्य आरोपी शिमला आने से पहले कुल्लू में एलएसडी बेचने की फिराक में थे। उसी समय निलंबित किए गए चारों STF जवान भी कुल्लू में तैनात थे। हालांकि, एजेंसियां अभी यह स्पष्ट नहीं कर रही हैं कि इन जवानों की संलिप्तता किस स्तर तक थी या उनके द्वारा किस प्रकार की लापरवाही बरती गई। अधिकारियों का मानना है कि यह सुरक्षा और अनुशासन की गंभीर चूक है, और इसकी जांच पूरी गंभीरता से की जा रही है।
इस ड्रग तस्करी के मामले की तहकीकात गुप्त सूचना के आधार पर की गई। पुलिस के स्पेशल सेल ने शिमला के बीसीएस इलाके में छापा मारकर संदीप शर्मा और प्रिया शर्मा को गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से कुल 11.570 ग्राम वजन की 562 LSD स्ट्रिप्स बरामद की गईं। पुलिस ने पूछताछ के आधार पर हरियाणा के गुरुग्राम से गिरोह के मास्टरमाइंड नविएल हैरिसन (निवासी कालीकट, केरल) को भी गिरफ्तार किया।
जांच के दौरान पता चला कि इस अंतरराष्ट्रीय तस्करी के नेटवर्क में कई स्तर शामिल थे। मुख्य फोकस यह जानना है कि STF के जवानों की भूमिका कितनी गंभीर थी और क्या उन्होंने जानबूझकर इस नेटवर्क को मदद दी या केवल लापरवाही हुई। इस मामले में CID और शिमला पुलिस अलग-अलग स्तर पर गहन जांच कर रही हैं।
अधिकारियों का कहना है कि निलंबित किए गए चारों STF कर्मचारियों को इस मामले में अनुशासनहीनता और संभावित अनियमितताओं के लिए तत्काल सस्पेंड किया गया है। इन जवानों की गिरफ्तारी या सजा से जुड़े निर्णय जांच पूरी होने के बाद लिए जाएंगे। वहीं, सुरक्षा एजेंसियां यह सुनिश्चित कर रही हैं कि मामले में शामिल अन्य पुलिसकर्मी या अधिकारी भी जांच के दायरे में आएं।
इस मामले ने हिमाचल प्रदेश पुलिस की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सुरक्षा बलों का कोई सदस्य अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क में शामिल पाया गया, तो यह राज्य की कानून-व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती होगी। नागरिकों का विश्वास पुलिस पर बना रहना बहुत जरूरी है, और इस तरह की घटनाएं उस भरोसे को कमजोर करती हैं।
जांच का यह मामला केवल शिमला तक ही सीमित नहीं है। यह पूरा नेटवर्क कई राज्यों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ है। इसलिए पुलिस और CID की संयुक्त जांच में राज्य के बाहर की गतिविधियों को भी ट्रैक किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि इस नेटवर्क में कई ऐसे लोग शामिल हैं, जो कानून की पकड़ से दूर रहकर ड्रग तस्करी कर रहे थे।
इस घटना के बाद STF और अन्य पुलिस एजेंसियों के भीतर आंतरिक समीक्षा की भी शुरुआत की गई है। अधिकारियों ने कहा है कि इस प्रकार की लापरवाही और संभावित संलिप्तता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निलंबन का निर्णय यह सुनिश्चित करता है कि जांच पूरी निष्पक्षता और स्वतंत्रता के साथ हो।
मामले के सार्वजनिक होने के बाद सामाजिक और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। लोगों ने पुलिस प्रशासन और STF पर सवाल उठाए हैं कि आखिर कैसे सुरक्षा बल के लोग इस तरह के संवेदनशील मामले में संदिग्ध हो सकते हैं। वहीं, कानून विशेषज्ञों का कहना है कि इस जांच का निष्कर्ष राज्य के लिए मिसाल बन सकता है, और भविष्य में इस तरह की लापरवाही को रोकने में मदद करेगा।
शिमला पुलिस और CID दोनों यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि इस अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क का पूरा खुलासा हो और शामिल सभी लोग कानून के दायरे में आएं। शुरुआती गिरफ्तारी और निलंबन की कार्रवाई इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार और पुलिस इस मामले को गंभीरता से ले रही है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि निलंबित STF जवानों के खिलाफ क्या आगे की कार्रवाई होगी। जांच पूरी होने के बाद ही उनकी संलिप्तता के स्तर और संभावित सजा का निर्धारण किया जाएगा। पुलिस अधिकारियों ने यह भी कहा है कि राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी सुरक्षाकर्मियों की निगरानी और प्रशिक्षण और सख्त किया जाएगा। यह मामला हिमाचल प्रदेश में ड्रग तस्करी और पुलिस प्रशासन की जवाबदेही के बीच गंभीर सवाल खड़ा करता है। राज्य में कानून और व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि सुरक्षा बल अपने कर्तव्यों के प्रति पूरी तरह जिम्मेदार और संवेदनशील बने रहें।
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