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USS अब्राहम लिंकन की हालत देख चीन ने कसा तगड़ा तंज
Beijing बीजिंग। अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन के थाईलैंड पहुंचने के बाद चीन की सरकारी मीडिया ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने युद्धपोत की हालत को लेकर टिप्पणी करते हुए अमेरिकी सैन्य व्यवस्था और वैश्विक दबदबे की नीति पर सवाल उठाए हैं। ग्लोबल टाइम्स ने अपने एक लेख में दावा किया कि 286 दिनों तक समुद्र में रहने के बाद जब यूएसएस अब्राहम लिंकन थाईलैंड के लैम चाबांग बंदरगाह पहुंचा तो जहाज के कई हिस्सों पर जंग दिखाई दी। अखबार ने इसी को आधार बनाकर अमेरिकी सैन्य तैनाती और रखरखाव व्यवस्था पर निशाना साधा।
चीनी अखबार ने लिखा कि जंग को साफ किया जा सकता है और जहाज पर दोबारा पेंट किया जा सकता है, लेकिन किसी व्यवस्था की अंदरूनी कमजोरियों और संरचनात्मक थकान को केवल नए रंग से नहीं छिपाया जा सकता। अखबार ने इसे अमेरिका की वैश्विक सैन्य रणनीति से जोड़ते हुए कटाक्ष किया। रिपोर्ट में कहा गया कि जहाज की तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर चर्चा पैदा कर दी। कुछ लोगों ने जहाज की हालत पर सवाल उठाए, जबकि कुछ ने इसे लंबे समय तक चले मिशन का परिणाम बताया। ग्लोबल टाइम्स ने दावा किया कि यह स्थिति अमेरिकी नौसेना पर बढ़ते दबाव को दिखाती है।
यूएसएस अब्राहम लिंकन मध्य पूर्व में एक लंबे मिशन के बाद थाईलैंड पहुंचा है। अमेरिका के अनुसार, जहाज का चालक दल सैन डिएगो स्थित अपने होम पोर्ट लौटने से पहले थाईलैंड में आराम और पुनर्गठन के लिए रुका है। चीन के सैन्य विशेषज्ञ झांग जुनशे ने ग्लोबल टाइम्स से बातचीत में कहा कि समुद्री वातावरण में जंग लगना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन जहाज पर दिखाई दे रही स्थिति उसके लंबे समय तक लगातार अभियान में रहने का संकेत देती है।
उन्होंने अमेरिकी नौसेना के सामने मौजूद चुनौतियों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, सीमित शिपयार्ड क्षमता, रखरखाव में कठिनाइयां और कुशल कर्मचारियों की कमी जैसी समस्याएं अमेरिकी नौसेना को प्रभावित कर रही हैं। ग्लोबल टाइम्स ने अमेरिका की वैश्विक सैन्य मौजूदगी पर भी सवाल उठाए। अखबार ने कहा कि एशिया-पैसिफिक, यूरोप और मध्य पूर्व जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सैन्य तैनाती बनाए रखने से अमेरिकी जहाजों, सैनिकों और लॉजिस्टिक नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है।
हालांकि, अमेरिकी नौसेना की ओर से जहाज की स्थिति को लेकर कोई बड़ी चिंता नहीं जताई गई है। नौसेना के लिए लंबे समुद्री अभियानों के बाद रखर व और मरम्मत एक सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है। USS अब्राहम लिंकन पर चीन की टिप्पणी को दोनों देशों के बीच जारी रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के नजरिए से भी देखा जा रहा है। अमेरिका और चीन लंबे समय से सैन्य क्षमता, क्षेत्रीय प्रभाव और वैश्विक नेतृत्व को लेकर आमने-सामने हैं।
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