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छठ महापर्व की शुरुआत आज से

Nilmani Pal
25 Oct 2025 7:06 AM IST
छठ महापर्व की शुरुआत आज से
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प्रकृति की पूजा और आस्था के लोकपर्व छठ महापर्व की शुरुआत आज से हो रही है. चार दिवसीय यह पर्व प्रकृति को दैवीय सम्मान, परिवेश की स्वच्छता, नदी या जल स्त्रोत के महत्व और ऋतु परिवर्तन से जुड़ा हुआ है.

छठ पूजा कबसे शुरू हुई? इस प्रश्न का ठीक सटीक जवाब देना मु्श्किल हो सकता है, क्योंकि इस पर्व की मान्यता एक देवी से जु़ड़ी हुई है, लेकिन वास्तव में पूजा सूर्य की ही होती है. वेदों से लेकर पौराणिक आख्यान में सूर्य पूजा का तो विस्तार से उल्लेख मिलता है, लेकिन छठी माता का सीधा जिक्र नहीं मिलता है. हालांकि भारत की लोक परंपरा जो कि बच्चों के जन्म से जुड़ी हुई है, उसमें षष्ठी तिथि का बहुत महत्व है और बच्चों के जन्म के पांचवें-छठें दिन उनकी छठी संस्कार की विधि की जाती है.

छठी एक लोक देवी हैं, और माना जाता है कि वह नवजात बच्चों की सुरक्षा करती हैं. वहीं सूर्य पूजा का जिक्र भारत के दोनों प्रसिद्ध महाकाव्यों (रामायण-महाभारत) में तो मिलता ही है. हालांकि वह छठ पूजा के आज के स्वरूप जैसा नहीं है. सभी पुराणों में वर्णित जल प्रलय की पहली कथा का जो जिक्र होता है, उसकी शुरुआत सूर्यपूजा से ही होती है.

महाराज मनु ने जब स्नान के बाद कमर तक जल में रहकर सूर्यदेव को अर्घ्य दिया उसी समय उनकी हथेली के जल में एक मछली आ गई. उस मछली ने मनु से खुद को बचाने की प्रार्थना की. वही मछली भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार थी. इसी तरह वैदिक ऋषिगण स्नान के बाद कमर तक जल में खड़े रहकर सूर्य उपासना करते रहे हैं. रामायण में, जब भगवान राम और माता सीता वनवास को निकले तब देवी सीता ने गंगा के जल में खड़े रहेकर अयोध्या की सुरक्षा और अपने सफल वनवास की कामना की थी. फिर जब वह लौटकर आए तो अयोध्या में प्रवेश से पहले माता सीता ने 14 वर्ष पहले किए सूर्य व्रत का गंगा में पारायण किया था.

दीपावली के मौके पर अयोध्या वापसी के छह दिन बाद ही रामराज की स्थापना हुई थी और इस दिन भी श्रीराम ने अपने कुल के ईष्ट सूर्यदेव का व्रत रखा था. माता सीता ने सूर्य षष्ठी की पूजा की जो कि एक वैदिक अनुष्ठान रहा है. इसी अनुष्ठान के जरिए ही उन्हें लव और कुश के रूप में दो पुत्रों का आशीर्वाद भी मिला था. चंपारण (बिहार, भारत) और मधेश प्रांत (नेपाल) में, यह विश्वास है कि अयोध्या छोड़ने के बाद, सीता ने नारायणी (गंडकी) नदी के किनारे चितवन जिले में, भारत-नेपाल सीमा पर स्थित वाल्मीकि आश्रम में निवास किया. उस समय, उन्होंने नेपाल में सूर्यपूजा का अनुष्ठान किया. इसलिए छठ की मान्यता नेपाल में भी गहरे में हैं.

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