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परंपरा के प्रति श्रद्धा में कोई कमी नहीं
Jharkhand झारखंड। चीः नहाय खाय के साथ ही राज्य में लोक आस्था का महापर्व छठ शुरू हो चुका है। फल और सब्जियों के बाजार सज गए हैं और पूरे माहौल में भक्तिमय रंग छा गया है। घाटों की साफ-सफाई को अंतिम रूप दिया जा रहा है, वहीं जगह-जगह लाइटिंग की व्यवस्था कर माहौल और श्रद्धाभावपूर्ण बनाया जा रहा है। जिला प्रशासन के साथ-साथ शहर और गांवों में बनी समितियां भी इस काम में जुटी हैं ताकि छठ व्रतियों को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। हर साल की तरह इस साल भी जेलों में बंदियों के लिए छठ महापर्व मनाने की विशेष व्यवस्था की गई है।
झारखंड की जेलों में इस बार भी महापर्व छठ की छटा दिखाई दे रही है। प्रदेश के अलग-अलग जेलों में पुरुष बंदियों की संख्या महिला बंदियों से ज्यादा है। जेल प्रबंधन की ओर से पूजा करने वाले बंदियों को सभी प्रकार की सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। झारखंड कारा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य की जेलों में कुल 25 महिला और 31 पुरुष बंदियों ने छठ व्रत रखा है। रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में सबसे ज्यादा 08 महिला और 08 पुरुष बंदी छठी मैया की आराधना में लीन हैं। उनके लिए हर तरह की पूजन सामग्री उपलब्ध कराई गई है और अर्घ्य देने की व्यवस्था भी की गई है।
इसके अलावा केंद्रीय कारा दुमका में 02 महिलाएं, लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा हजारीबाग में 05 महिला और 07 पुरुष, केंद्रीय कारा पलामू में 04 महिला और 06 पुरुष बंदी छठी मैया की पूजा कर रहे हैं। बोकारो मंडल कारा में एक महिला, चतरा मंडल कारा में 02 पुरुष, धनबाद मंडल कारा में 04 महिला और 06 पुरुष, गिरिडीह मंडल कारा में 01 पुरुष और पाकुड़ मंडल कारा में एक महिला बंदी व्रत में शामिल हैं। सभी जेलों के जेल अधीक्षकों ने बंदियों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की है, ताकि वे शांति और श्रद्धा के साथ व्रत निभा सकें।
जेलों में भक्तिमय माहौल देखने को मिल रहा है। बंदियों द्वारा पूजा अर्चना के दौरान सभी सुरक्षा और नियमों का पालन किया जा रहा है। जेल प्रबंधन ने सुनिश्चित किया है कि पूजा सामग्री, अर्घ्य देने की व्यवस्था और धार्मिक स्थल का सजावट सभी बंदियों की सुविधा के अनुरूप रहे। छठ महापर्व के अवसर पर जेलों में बंदियों का उत्साह और श्रद्धा देखते ही बनती है। जेलों में पुरुष और महिला बंदियों का यह उत्साह यह दिखाता है कि भले ही वे समाज से अलग हों, लेकिन उनकी आस्था और लोक परंपरा के प्रति श्रद्धा में कोई कमी नहीं आई है।
इस प्रकार, झारखंड की जेलों में इस साल भी छठ महापर्व की तैयारी और आयोजन सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। जेल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों ने मिलकर यह सुनिश्चित किया है कि बंदियों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो और सभी शांति और श्रद्धा के साथ व्रत और पूजा कर सकें। छठ महापर्व का यह आयोजन न केवल बंदियों के लिए आध्यात्मिक अनुभव का अवसर है, बल्कि उन्हें समाज के साथ जोड़ने और मानसिक रूप से सशक्त बनाने का भी माध्यम बनता है। इस तरह, जेलों में भी पर्व की छटा और भक्तिभाव की भावना पूरी तरह जीवित है।
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