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CBSE ने जारी किए त्रिभाषा नीति के दिशा-निर्देश, कक्षा 10 के मौजूदा छात्रों को नहीं देनी होगी तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा

jantaserishta.com
29 Jun 2026 4:25 PM IST
CBSE ने जारी किए त्रिभाषा नीति के दिशा-निर्देश, कक्षा 10 के मौजूदा छात्रों को नहीं देनी होगी तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा
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नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप त्रिभाषा नीति को लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। हालांकि कक्षा 10 के मौजूदा छात्रों के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है। वे केवल दो भाषाओं के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखेंगे व बोर्ड परीक्षा देंगे।
इसके साथ ही बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों पर अतिरिक्त दबाव डालना नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं के अध्ययन को बढ़ावा देना और बहुभाषी दक्षता विकसित करना है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी छात्र को इस बदलाव के कारण नुकसान न उठाना पड़े। नई नीति के तहत तीन भाषाओं का अध्ययन किया जाएगा, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य होगा। तीसरी भाषा भारतीय भाषा या विदेशी भाषा दोनों में से कोई भी हो सकती है, बशर्ते अन्य दो भाषाएं भारतीय हों।
सबसे बड़ी राहत वर्तमान कक्षा 10 के विद्यार्थियों को दी गई है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 10 में पढ़ रहे छात्रों के लिए कोई बदलाव नहीं होगा। वे पहले की तरह केवल दो भाषाओं के साथ अपनी पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा पूरी करेंगे। इस बैच को तीसरी भाषा पढ़ने की आवश्यकता नहीं होगी।
वहीं वर्तमान कक्षा 9 के विद्यार्थियों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होंगी। यदि कोई छात्र पहले से दो भारतीय भाषाएं पढ़ रहा है, तो वह तीसरी भाषा के रूप में भारतीय भाषा या अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन जैसी विदेशी भाषा चुन सकता है।
यदि कोई छात्र एक भारतीय भाषा और एक विदेशी भाषा पढ़ रहा है, तो उसे तीसरी भाषा के रूप में किसी भारतीय भाषा का चयन करना होगा। सीबीएसई ने वर्तमान कक्षा 9 के उन विद्यार्थियों को विशेष एकमुश्त राहत दी है जो पहले से अंग्रेजी और फ्रेंच जैसी दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे हैं। ऐसे छात्रों को अपनी दोनों विदेशी भाषाएं जारी रखने की अनुमति होगी, लेकिन उन्हें एक अतिरिक्त भारतीय भाषा भी पढ़नी होगी।
हालांकि इन छात्रों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तीसरी भाषा की कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर आंतरिक आकलन के माध्यम से किया जाएगा। जब यह बैच 2027-28 में कक्षा 10 में पहुंचेगा, तब भी तीसरी भाषा के लिए सीबीएसई बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं करेगा।
वर्तमान कक्षा 7 और 8 के विद्यार्थियों के लिए भी लगभग यही व्यवस्था लागू होगी। जब ये छात्र कक्षा 9 और 10 में पहुंचेंगे, तब उन्हें तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी। यदि उन्होंने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुन रखी हैं, तो उन्हें एक अतिरिक्त भारतीय भाषा जोड़नी होगी। इन बैचों के लिए भी तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल विद्यालय स्तर पर होगा और कक्षा 10 में इसकी बोर्ड परीक्षा नहीं ली जाएगी। नई व्यवस्था का पूर्ण स्वरूप वर्तमान कक्षा 6 के मौजूदा विद्यार्थियों और उसके बाद आने वाले बैचों पर लागू होगा। इन छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी। जब ये विद्यार्थी कक्षा 10 तक पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा भी देंगे।
इसके लिए एनसीईआरटी ने 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में विशेष पाठ्यपुस्तकें तैयार की हैं, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जा रहा है। सीबीएसई ने कुछ श्रेणियों के विद्यार्थियों को विशेष छूट भी प्रदान की है। दिव्यांग विद्यार्थियों को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधानों के अनुसार आवश्यक रियायतें और छूट मिलेंगी।
विदेशों में संचालित सीबीएसई विद्यालयों को तीसरी भारतीय भाषा पढ़ाने की अनिवार्यता से पूर्ण छूट दी गई है। विदेश से भारत लौटने वाले विदेशी छात्रों को भी तीसरी भारतीय भाषा पढ़ने से मुक्त रखा गया है। यदि किसी छात्र के माता-पिता या अभिभावक किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित हो जाते हैं, तो छात्र अपनी पहले से चुनी गई भाषा व्यवस्था को जारी रख सकेगा।
ऐसे मामलों में स्कूलों को आवश्यक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराने होंगे ताकि छात्र की पढ़ाई प्रभावित न हो। बोर्ड ने विद्यालयों को भाषा शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लचीली व्यवस्था अपनाने की अनुमति दी है। स्कूल जरूरत पड़ने पर वर्तमान शिक्षकों, सेवानिवृत्त शिक्षकों, स्नातकोत्तर योग्यताधारी व्यक्तियों, विद्यालय समूहों के बीच शिक्षक साझाकरण तथा ऑनलाइन एवं हाइब्रिड शिक्षण का उपयोग कर सकेंगे।
सीबीएसई का कहना है कि नई भाषा नीति का केंद्र परीक्षा नहीं, बल्कि सीखना है। विद्यार्थियों को रटने के बजाय समझ विकसित करने, भाषा के व्यावहारिक उपयोग और आनंददायक शिक्षण अनुभव पर ध्यान दिया जाएगा। बोर्ड और एनसीईआरटी विद्यार्थियों के लिए आयु और कक्षा के अनुरूप अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराएंगे ताकि नई भाषा सीखना आसान और रोचक बन सके।
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप किए जा रहे ये बदलाव छात्रों के हितों को ध्यान में रखकर लागू किए जा रहे हैं। किसी भी विद्यार्थी को इस दौरान नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। सीबीएसई का मानना है कि बहुभाषी दक्षता न केवल छात्रों की शैक्षणिक क्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि उन्हें भारतीय भाषाओं, संस्कृति और विविधता से भी गहराई से जोड़ने में मदद करेगी।
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