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B.Tech ड्रॉपआउट निकला साइबर ठगी का मास्टरमाइंड, 150 करोड़ का फ्रॉड

SHIDDHANT
5 Oct 2026 11:32 PM IST
B.Tech ड्रॉपआउट निकला साइबर ठगी का मास्टरमाइंड, 150 करोड़ का फ्रॉड
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MUMBAI मुंबई। मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच की प्रॉपर्टी सेल ने साइबर ठगी के लिए कथित तौर पर APK फाइल तैयार करने वाले 36 वर्षीय बीटेक ड्रॉपआउट को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी इंदौर में रहकर काम कर रहा था और उसकी बनाई करीब 2,805 APK फाइलों का इस्तेमाल देशभर में साइबर फ्रॉड के लिए किया गया। इन मामलों में ठगी की रकम 150 करोड़ रुपए से ज्यादा होने का अनुमान है। मामले का खुलासा 13 अगस्त को बायकुला में सामने आए साइबर फ्रॉड की जांच के दौरान हुआ। यहां एक वरिष्ठ नागरिक को एक फाइल भेजकर उस पर क्लिक करने के लिए कहा गया था। फाइल पर क्लिक करने के बाद उनके बैंक खाते से कथित तौर पर 5.62 लाख रुपए निकल गए। शिकायत मिलने के बाद प्रॉपर्टी सेल ने जांच शुरू की और तकनीकी कड़ियों को जोड़ते हुए आरोपी तक पहुंची।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर साइबर ठगों के लिए अलग-अलग नामों और सेवाओं से जुड़ी APK फाइल तैयार करता था। इनमें पेंशन कार्ड वेरिफिकेशन, लाइफ सर्टिफिकेट, सीनियर सिटीजन कार्ड, RTO चालान, क्रेडिट कार्ड वेरिफिकेशन और अपडेट के नाम पर बनाई गई फाइलें शामिल थीं। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने करीब 2,805 APK फाइलें बनाई थीं और इनके संचालन के लिए सर्वर भी किराए पर लिया था। आरोप है कि इन फाइलों को साइबर ठगी करने वाले लोगों को उपलब्ध कराया जाता था और आरोपी उन्हें तकनीकी सहायता भी देता था।
जांच में सामने आया है कि पीड़ितों को कॉल या मैसेज के जरिए संपर्क किया जाता था। इसके बाद सरकारी सेवा, कार्ड या वेरिफिकेशन के नाम पर APK फाइल इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता था। पीड़ित के फाइल इंस्टॉल करने के बाद ठग आगे की प्रक्रिया को अंजाम देते थे। 1930 साइबर हेल्पलाइन पर दर्ज जानकारी के आधार पर इस नेटवर्क से जुड़ी APK फाइलों के संबंध में हजारों पीड़ितों और शिकायतों की जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, ठगी की अनुमानित रकम 150 करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकती है। जांच आगे बढ़ने पर यह आंकड़ा बढ़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने शुरुआत में ऐप और वेबसाइट डेवलपमेंट का काम शुरू किया था। इसी दौरान वह कथित तौर पर साइबर फ्रॉड करने वाले लोगों के संपर्क में आया। इसके बाद उसने साइबर ठगी के लिए APK फाइल तैयार कर उन्हें बेचने का काम शुरू कर दिया। पुलिस का कहना है कि यह सिंडिकेट देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय था। अब आरोपी से पूछताछ कर उन लोगों की पहचान की जा रही है, जिन्होंने उससे APK फाइल खरीदी थीं। इसके साथ ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और ठगी की वास्तविक रकम का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
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