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बसपा ने सर्वाधिक क्षति दलितों-आदिवासियों को पहुंचाया: उदित राज

Shantanu Roy
24 Feb 2025 12:27 AM IST
बसपा ने सर्वाधिक क्षति दलितों-आदिवासियों को पहुंचाया: उदित राज
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New Delhi. नई दिल्ली। जब राहुल गांधी जी के नेतृत्व में संघ और बीजेपी कमजोर हो रहे हैं, मायावती उनका रक्षक बनकर आगे आईं हैं । राहुल गांधी जी के द्वारा दलितों- पिछड़ों और आदिवासियों की मौलिक समस्याओं को उठाने से सबसे ज़्यादा मायावती जी परेशान हैं । राहुल जी ने कहा जब आप वित्तीय आंकड़ों को देखते हैं, तो आदिवासियों को 100 रुपये में से 10 पैसे मिलते हैं, दलितों को 100 रुपये में से 5 रुपये मिलते हैं और ओबीसी को भी लगभग इतनी ही रकम मिलती है। इससे चोट संघ और बीजेपी पर हुई और दर्द मायावती जी को हुआ। मायावती जी से कुछ सवाल पूछता हूँ , जवाब आएगा नहीं लेकिन दलितों को पता लगना चाहिए कि उनकी सर्वाधिक क्षति बसपा से पहुँची है।


1. 20 मई 2007 को मायावती सरकार ने शासनादेश (पैरा 18) जारी करके अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (1989) को एक तरह से ख़त्म कर दिया था। इसके कारण केवल हत्या या रेप तक ही यह क़ानून सीमित हो गया और अन्य अपराध साधारण क़ानून के तहत निपटाने का प्रावधान हो गया। ऐसी स्थिति में इस क़ानून को बनाने का मतलब क्या रह जाता है ? इस तरह से सामान्य क़ानून से भी अधिक कमजोर कर दिया था। रेप के मामले में मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही होगी। ज्ञात होना चाहिए कि यह क़ानून राजीव गांधी की सरकार ने 1989 में बनाया था। देश का दलित-आदिवासी समाज जवाब माँगता है और माँगता रहेगा कि इतना अन्याय किसी सामान्य वर्ग के सीएम ने देश में नहीं किया। केंद्र सरकार के द्वारा बनाये गए क़ानून को राज्य सरकार बदल या छेड़- छाड़ नहीं कर सकती। इस आधार पर मैंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर करके इस क़ानून को बचाया।
2. 85वें संवैधानिक संशोधन को चुनौती सुप्रीम कोर्ट में 2006 में दिया और इसे नागराज के नाम से जाना जाता है। इस मुक़दमा को कांग्रेस सरकार के सहयोग से हमने सुप्रीम कोर्ट में जीता था। उस समय मैं कांग्रेस में नही था और निजी एडवोकेट से पैरवी कराने के लिए सरकार से आग्रह किया। निजी एडवोकेट को भारी फ़ीस हम नहीं दे सकते थे और अति महत्वपूर्ण मामलों में ऐसा करना पड़ता है। क्या कोई सरकार इतना दलित हितैषी हो सकती है कि मेरे आग्रह पर निजी वरिष्ठ एडवोकेट से पैरवी के लिए तैयार हो ? मनमोहन सिंह की सरकार ने यह असाधारण कार्य किया और 40 लाख का भुगतान हुआ। सरकारी मुक़दमे की पैरवी एटॉर्नी जनरल और सॉलिसीटर जनरल की टीम करती है। इतना दरियादिली कांग्रेस पार्टी ही दिखा सकती है कि निजी वकील की फ़ीस की ज़िम्मेदारी ली। सुप्रीम कोर्ट के इसी निर्णय के आधार पर 4जनवरी 2011 को लखनऊ हाई कोर्ट का फ़ैसला अदम पैरवी में हारा गया और उस समय आप सीएम थीं। मुक़दमे को
आसानी
से जीता जा सकता था अगर नागराज की तीन शर्तों की फाइल की कार्यवाही की गयी होती। परिणामस्वरूप उ.प्र. के लाखों एससी/एसटी कर्मचारी डिमोट हुए और ठीकरा सपा सरकार पर फूटा क्योंकि सरकार बदल गई थी। इसका असर उत्तराखंड में भी हुआ और एससी/एसटी कर्मचारियों को भारी क़ीमत चुकानी पड़ी। आपसे ज़्यादा कोई आरक्षण विरोधी नहीं हो सकता? देश में सभी राज्य सरकारें नागराज की शर्तों को पूरा करते हुए आरक्षण को लागू रखा। उसी समय नीतीश कुमार और अशोक गहलौत की सरकारों ने नागराज की शर्तों की फाइल की कार्यवाही पूरी करते हुए पदोन्नति में आरक्षण चालू रखा लेकिन आपके पास दलितों के लिए समय कहाँ था? प्रदेश को लूटने में लगी हुईं थी।
3. आप सबसे ज़्यादा आदिवासी विरोधी भी हैं । 2006 में कांग्रेस सरकार ने अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 को पास किया था। वन में निवास करने वाली जनजाति द्वारा आजीविका के लिए निवास या स्व-कृषि हेतु व्यक्तिगत या साझा व्यवसाय के तहत वन भूमि पर कब्जा करने और रहने का अधिकार दिया गया था। जीवन यापन के लिए 92402 आवेदन किए गए थे लेकिन आपकी सरकार 81% को निरस्त कर दिया अर्थात् इन्हें क़ब्ज़ा नहीं मिला। (स्रोत दारापुरी उ.प्र. सरकार के पूर्व आईपीएस का लेख)।
कांग्रेस ने डॉ अंबेडकर का इस्तेमाल वोट के लिए नहीं किया और जितना सम्मान उन्हें दिया कोई सोच नहीं सकता। डॉ अंबेडकर कांग्रेस के विरोध में थे तो भी उन्हें संविधान निर्मात्री समिति का चेयरमैन बनाया। क़ानून मंत्री बनाया और कांग्रेस छोड़ने के बाद भी 1954में राज़्य सभा भेजने में मदद किया। आप दलितों को भावुक बनाने के लिए एक ही रट लगाते रहते हो कि बाबा साहेब को कांग्रेस ने चुनाव में हराया और भारत रत्न नहीं दिया। क्या आप या आपकी पार्टी के लोग चुनाव हारने के लिए लड़ते हैं? भारत रत्न खिलाड़ी और कलाकार को भी मिल चुका है। असली बात है संविधान बनाने की ज़िम्मेदारी दी जिससे आप और हम जैसे लोग पैदा हो सके। बसपा गत चार दशक से इसलिए ज़िंदा रही कि कांग्रेस पार्टी ने सहानुभूति की दृष्टि से देखा। चार बार सीएम रहने के बाद भी आपने एक भी अच्छा काम शिक्षा, स्वास्थ्य, आरक्षण पर किया हो, ऐसा कत्तई नहीं हुआ । शुरू से ही आरएसएस से अंदरूनी हाथ मिलाकर कांग्रेस पर झूठा आरोप के आधार पर बसपा पलती रही।
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