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आयुष्मान भारत योजना में रिश्वत का खुलासा, 11 लाख की रिश्वत लेते डॉक्टर गिरफ्तार
Shantanu Roy
15 Dec 2025 9:07 PM IST

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जांच में होंगे कई बड़े खुलासे
Bhilwara/Jaipur. भीलवाड़ा/जयपुर। भीलवाड़ा के भीमगंज थाना इलाके में आयुष्मान भारत योजना के बिल पास करने के नाम पर रिश्वत मांगने वाले डॉक्टर को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी डॉक्टर पंकज छीपा (40) ने एक प्राइवेट अस्पताल से 14 लाख रुपए की मांग की थी और धमकी दी कि रकम नहीं देने पर अस्पताल में योजना को बंद कर दिया जाएगा। मामले की जानकारी के अनुसार, अस्पताल के मैनेजर ने प्रारंभ में ही डॉक्टर की इस अवैध मांग को गंभीरता से लिया और अजमेर स्थित ACB कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के सत्यापन और छापेमारी योजना तैयार करने के बाद ACB की टीम ने सोमवार शाम को कार्रवाई की।
ACB के डीएसपी नरपत सिंह ने बताया कि मामला आयुष्मान भारत योजना के बिल पासिंग प्रकरण से संबंधित है। डॉक्टर पंकज छीपा ने अस्पताल के मैनेजर से संपर्क कर कहा कि “आपने पोर्टल पर जो बिल डाले हैं, उनमें अनियमितताएं हैं। मेरे साथी डॉ. कुलदीप (जयपुर) इन बिलों की जांच कर रहे हैं। अगर आप हमें 14 लाख रुपए देंगे तो हम अनियमितताओं को अनदेखा करेंगे और बिल पास कर देंगे।” इसके बाद डॉक्टर और अस्पताल के बीच डील 11 लाख रुपए में तय हुई। ACB ने अस्पताल मैनेजर राकेश को 9 लाख रुपए के नकली नोट और 2 लाख रुपए के असली नोट देने के लिए भेजा। राकेश ने तिलक नगर रोड पर डॉक्टर पंकज छीपा को रकम दी और इशारे पर ACB टीम ने डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया।
जांच में पता चला कि आरोपी डॉक्टर ने अपने सहयोगी डॉ. कुलदीप से भी संपर्क किया और इस बात की पुष्टि की कि रुपए ले लिए गए हैं। दोनों के नंबर और अन्य डिजिटल साक्ष्य ACB के पास हैं, जिनकी पड़ताल की जा रही है। पीड़ित अस्पताल मैनेजर ने बताया कि जयपुर में बैठे डॉ. कुलदीप ने महीने भर से धमकी दी थी कि यदि राशि नहीं दी गई तो योजना उनके अस्पताल में बंद कर दी जाएगी। शुरुआत में मांग 14 लाख रुपए की थी, लेकिन बाद में यह राशि 11 लाख रुपए पर तय हुई। मैनेजर के अनुसार, वह इस दबाव और धमकी से परेशान होकर ही ACB में शिकायत करने के लिए मजबूर हुआ।
ACB के अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई इस बात का उदाहरण है कि भ्रष्टाचार के मामलों में सूझबूझ और सतर्कता से ही आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा जा सकता है। अधिकारी ने यह भी कहा कि मामले की पूरी जांच जारी है और इसके अन्य पहलुओं, जैसे कि डॉ. कुलदीप की भूमिका और योजना में किसी भी तरह के फर्जीवाड़े की जांच की जा रही है। मामले ने स्वास्थ्य क्षेत्र में चल रही अवैध गतिविधियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रशासन की सतर्कता को उजागर किया है। आयुष्मान भारत योजना जैसे जनकल्याणकारी कार्यक्रम में भ्रष्टाचार न केवल योजनाओं के क्रियान्वयन को प्रभावित करता है, बल्कि मरीजों और अस्पताल प्रबंधन के लिए गंभीर समस्याएं भी पैदा करता है।
अस्पताल प्रबंधन ने भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी किसी भी अवैध मांग के खिलाफ तुरंत प्रशासन और पुलिस को सूचित किया जाएगा। ACB अधिकारियों ने आम जनता और अस्पतालों से अपील की कि वे किसी भी अवैध मांग या भ्रष्टाचार की सूचना तुरंत एंटी करप्शन ब्यूरो को दें। इस कार्रवाई के बाद भीलवाड़ा और अजमेर में स्वास्थ्य और जनकल्याण से जुड़े अधिकारियों में सतर्कता बढ़ गई है। अधिकारियों ने कहा कि भ्रष्टाचार में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और संबंधित सभी आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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